नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मैथिली भाषा को बड़ा शैक्षणिक सम्मान देते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के पाठ्यक्रम में पहली से माध्यमिक कक्षा तक मातृभाषा विषय के रूप में शामिल करने का निर्णय लिया है। भाजपा सांसद सह लोकसभा में पार्टी सचेतक गोपाल जी ठाकुर ने इसे साढ़े आठ करोड़ मिथिलावासियों के सम्मान से जुड़ा ऐतिहासिक कदम बताया है। 
डॉ. ठाकुर ने केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी द्वारा भेजे गए पत्र के हवाले से कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप कक्षा एक से माध्यमिक स्तर तक विद्यार्थियों को मातृभाषा में शिक्षा देने की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल की गई है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने मैथिली सहित 121 भारतीय भाषाओं में प्राइमर विकसित किए हैं। साथ ही, एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों का अनुवाद भी मैथिली समेत संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में किया जा रहा है।
डॉ. ठाकुर के अनुसार, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (स्कूल शिक्षा)-2023 के तहत मैथिली भाषा को स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से माध्यमिक स्तर पर मैथिली विषय को पाठ्यक्रम में सम्मिलित कर लिया है। मैथिली का पाठ्यक्रम सीबीएसई की अकादमिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध करा दिया गया है।
सांसद ने कहा कि उन्होंने 8 फरवरी 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी से मुलाकात कर सीबीएसई पाठ्यक्रम में मैथिली को शामिल करने की मांग उठाई थी। इसके लिए उन्होंने मंत्रालय को पत्र सौंपकर मिथिलावासियों की भावनाओं से अवगत कराया था।
डॉ. ठाकुर ने कहा कि भारतीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए मोदी सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय आने वाले समय में मैथिलीभाषी विद्यार्थियों के लिए वरदान साबित होगा।

