डेस्क: ईरान (Iran) और अमेरिका (America) के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम (सीज़फायर) के पीछे असली काम चीन (China) ने किया है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि बीजिंग (Beijing) ने पर्दे के पीछे ईरान को युद्धविराम के लिए मनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद ईरान और अमेरिका दोनों दो हफ्ते के सीज़फायर पर सहमत हुए, और जल्द ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी खोला जाएगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन जो ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, ने ईरानी अधिकारियों से बातचीत कर कहा कि युद्ध को जल्द से जल्द समाप्त करना जरूरी है। बीजिंग ने पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे मध्यस्थों के साथ मिलकर यह प्रयास किया और अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए ईरान को राज़ी करवाया।
चीन ने जताई चिंता
पहले ही चीन ने इस संघर्ष पर गहरी चिंता जताई थी। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा था कि सभी पक्षों को ईमानदारी दिखानी चाहिए और युद्ध को जल्द से जल्द रोकना चाहिए। उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता भी व्यक्त की।
पाकिस्तान के प्रयास नाकाम
इससे पहले पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ बनने की कोशिश की थी, लेकिन ईरान ने पाकिस्तान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। ईरान ने साफ कहा कि वह केवल अपनी शर्तों पर ही समझौता करेगा। अंततः चीन के हस्तक्षेप के बाद ईरान ने सीज़फायर को मंजूरी दी।
युद्धविराम के बाद ईरान का बयान
सीज़फायर के बाद ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने स्पष्ट किया कि युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ है। उनका कहना था, “हमारी उंगलियां अभी भी ट्रिगर पर हैं, और अगर दुश्मन ने जरा सी भी गलती की, तो उसका पूरा जवाब दिया जाएगा।” इसके साथ ही उन्होंने शुक्रवार से इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ बातचीत की जानकारी भी दी।
ट्रंप ने की थी घोषणा
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका ईरान पर हमले दो हफ्ते के लिए रोक देगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए तैयार होगा, तो अमेरिकी हमले तुरंत बंद कर दिए जाएंगे। ट्रंप ने उम्मीद जताई कि समस्या अब सुलझने के करीब है।
