चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर एक नया राजनीतिक ट्रेंड सामने आया है। AIADMK ने करीब 35 वर्षों में पहली बार किसी भी ब्राह्मण समुदाय के उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया है, जिससे राज्य की राजनीति में इस वर्ग के घटते प्रतिनिधित्व पर चर्चा तेज हो गई है।
राज्य के अन्य प्रमुख दल जैसे DMK और Indian National Congress ने भी अपनी सूची में ब्राह्मण उम्मीदवारों को जगह नहीं दी है। वहीं, Bharatiya Janata Party ने भी अपनी आवंटित सीटों पर इस समुदाय से प्रत्याशी नहीं उतारे।
जयललिता के बाद बदले हालात
तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री J. Jayalalithaa के निधन के बाद राज्य की राजनीति में यह बदलाव और स्पष्ट होता दिख रहा है। 2021 के चुनाव में AIADMK ने ब्राह्मण समुदाय से केवल एक उम्मीदवार उतारा था, जबकि इस बार पूरी तरह अनुपस्थिति नजर आ रही है।
वोट बैंक की रणनीति?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला जातिगत भेदभाव से ज्यादा “वोट बैंक” की राजनीति से जुड़ा है। तमिलनाडु में ब्राह्मणों की आबादी लगभग 3% मानी जाती है, ऐसे में पार्टियां बड़े सामाजिक समूहों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रही हैं।
आशुतोष झा
