डेस्क: नासा (NASA) का आर्टेमिस-2 (Artemis II) मिशन सोमवार को एक ऐतिहासिक उड़ान पर निकल रहा है। यह मिशन इंसानों को चंद्रमा (Moon) के उस रहस्यमयी हिस्से (फार साइड) तक ले जाएगा, जो पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता। 1972 के बाद यह पहली बार होगा जब मानव अंतरिक्ष यात्री इस दूरस्थ हिस्से तक पहुंचेंगे। मिशन में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं।
छह घंटे का फ्लाई-बाय, वैज्ञानिकों की निगाहें बनी रहेंगी सतह पर
ह्यूस्टन के जॉनसन स्पेस सेंटर से मिशन कंट्रोल और दुनियाभर के चंद्र वैज्ञानिक छह घंटे के फ्लाई-बाय पर नजरें टिकाए हुए हैं। इस दौरान वैज्ञानिक चंद्रमा की भू-वैज्ञानिक संरचनाओं और क्रेटरों का प्रत्यक्ष अध्ययन करेंगे, जिन्हें अब तक केवल रोबोटिक मिशनों और सीमित डेटा के जरिए समझा गया था। नासा के मुताबिक, मौजूदा कक्षीय स्थिति के कारण इस फ्लाई-बाय के दौरान चंद्रमा के दूरस्थ हिस्से का केवल 20 फीसदी ही सूर्य के प्रकाश में दिखाई देगा।
इतिहास रचेंगे हैनसेन और कोच
चारों अंतरिक्ष यात्रियों में ग्लोवर, रीड वाइजमैन और क्रिस्टीना कोच अमेरिकी हैं, जबकि हैनसेन कनाडाई हैं। हैनसेन पहले गैर-अमेरिकी होंगे, जो चंद्रमा पर जाएंगे। कोच और ग्लोवर क्रमशः पहली महिला और पहली अश्वेत अंतरिक्ष यात्री हैं, जो चंद्रमा के पास जाएंगी। मिशन का 10 दिन का कार्यक्रम प्रशांत महासागर में लैंडिंग के साथ समाप्त होगा।
ओरियन कैप्सूल में तकनीकी चुनौती
मिशन में एक समस्या ओरियन कैप्सूल के शौचालय में आई है। उड़ान भरने के बाद से यह काम नहीं कर रहा है। नासा ने अंतरिक्ष यात्रियों को अतिरिक्त मूत्र संग्रहण थैलियों का उपयोग करने के निर्देश दिए हैं। उप-प्रबंधक डेबी कोर्थ ने बताया कि कैप्सूल में शौचालय से दुर्गंध भी आ रही है।
ओरिएंटल बेसिन और क्रेटर: चंद्रमा की प्राचीन कहानियां
वैज्ञानिकों की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर ओरिएंटल बेसिन है। यह 930 किलोमीटर चौड़ा बहु-वलय प्रभाव बेसिन दक्षिणी गोलार्ध में स्थित है और माना जाता है कि यह एक विशाल क्षुद्रग्रह के टकराने से बना। इसके अलावा ओहम क्रेटर (64 किलोमीटर) और पियराज्जो क्रेटर (9 किलोमीटर) का प्रत्यक्ष अवलोकन किया जाएगा।
कनाडा का गौरव, हैनसेन का योगदान
कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी की अध्यक्ष लिसा कैंपबेल ने कहा कि हैनसेन आज कनाडा के लिए इतिहास रच रहे हैं। उनका मिशन भविष्य में और अधिक उपलब्धियों के लिए प्रेरणा बनेगा।
