
दरभंगा। ईसा मसीह के क्रूस (सलीब) पर चढ़ाए जाने और उनके बलिदान की याद में मनाया जाने वाला पुण्य शुक्रवार को शांति और श्रद्धा के साथ मनाया गया। गुड फ्राइडे को लेकर दरभंगा के कैथोलिक समुदाय के ईसाइयों ने शुक्रवार को दोनार स्थित स्थानीय होली क्रॉस स्कूल के परिसर से होली रोसरी कैथोलिक चर्च तक चौदह (14) मुकाम (स्थानों) की क्रूस यात्रा एवं झांकियां निकाली। क्रूस यात्रा में बड़ी संख्या में ईसाई धर्मावलंबी महिला पुरुष एवं स्कूली बच्चों ने भाग लिया। यात्रा के पूर्व ईसाइयों ने प्रभु यीशु मसीह की कुर्बानी और बलिदान की चर्चा करते हुए प्रेम, सत्य, शांति, भाईचारे और विश्वास के मार्ग पर चलने का प्रण लिया। गुड फ्राइडे की क्रुस यात्रा को लेकर पूरे ईसाई समाज के लोग शोक में डूब गए। होली रोसिरी कैथोलिक चर्च में पवित्र क्रूस के पहूँचने पर उसकी विधि विधान से उपासना की गयी।
होली रोसरी चर्च के पल्ली पुरोहित श्रद्देय फादर बेन्नी पॉल सी० एस० टी० ने प्रभु येसु के दुःखभोग का स्मरण और शब्द समारोह (प्रार्थना सभा) को संबोधित करते हुए प्रभु यीशु मसीह की कुर्बानी के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया प्रभु ईसा मसीह प्रेम और शांति के मसीहा थे। उन्होंने कहा ऐसी मान्यता है की इस दिन ईसा मसीह ने मानवता के पापों के लिए अपने प्राण त्याग दिए थे। इसलिए इसे त्याग, प्रेम और क्षमा का प्रतीक माना जाता है। हालाँकि यह एक दुखद घटना थी, फिर भी इसे “गुड” (अच्छा) इसलिए कहा जाता है क्योंकि ईसा मसीह के बलिदान को मानवता के लिए उद्धार का मार्ग माना जाता है। उन्होंने अपने संदेश में बताया कि गुड फ्राइडे (पुण्य शुक्रवार) को प्रभु यीशु मसीह के मुख से मृत्यु पूर्व ये मार्मिक शब्द निकले थे, “हे ईश्वर इन्हें क्षमा करें, क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं,”। आज से करीब 2008 वर्ष पहले ईसा मसीह यरूशलम मे रह कर मानवता के कल्याण के लिए भाईचारे, एकता और शांति के उपदेश देते थे। उन्हें प्रेम, सत्य,और विश्वास के मार्ग पर चलने की प्रेरणा का संदेश देते थे। उस समय के धार्मिक कट्टरपंथी यहूदीयों ने रोम के शासक से शिकायत कर उन्हें कलवारी के पहाड़ी पर क्रॉस (सूली) पर लटका दिया था। वह दिन फ्राइडे ( शुक्रवार) था, यही वजह है कि ईसाई धर्म को मानने वाले लोग गुड फ्राइडे के दिन को प्रभु यीशु मसीह के बलिदान दिवस के रूप में याद करते है। यह दिन ईसाई धर्म के अनुयायियों के लिए बेहद खास होता है। पल्ली परोहित, फादर रॉय मैथ्यू. सी.एस.टी ने पुण्य शुक्रवार (गुड फ्राइडे) के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा यह ईसाई धर्म का एक अत्यंत पवित्र और गंभीर दिवस है, जिस दिन येसु मसीह के क्रूस पर चढ़ाए जाने और उनके बलिदान को स्मरण किया जाता है। यह दिन मानवता के प्रति उनके असीम प्रेम, त्याग और क्षमा के संदेश को दर्शाता है। येसु मसीह ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में भी लोगों को प्रेम, करुणा और क्षमा का मार्ग दिखाया, यहाँ तक कि जिन्होंने उन्हें कष्ट दिया, उनके लिए भी उन्होंने ईश्वर से क्षमा की प्रार्थना की। येसु मसीह का क्रूस पर बलिदान केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं है, बल्कि यह आज भी मानव जीवन के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। फादर मैथ्यू ने कहा कि आज की दुनिया, जहाँ युद्ध, हिंसा, घृणा और स्वार्थ बढ़ते जा रहे हैं, वहाँ प्रभु येसु के द्वारा दिए गए प्रेम, शांति, सहनशीलता और क्षमा के मूल्य हमें सही रास्ता दिखाते हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। आज के समय में जब समाज विभाजन और संघर्ष का सामना कर रहा है, येसु मसीह के उपदेश हमें एकता, भाईचारा और मानवता की ओर प्रेरित करता है। उनका बलिदान हमें यह याद दिलाता है कि सच्चा बल प्रेम और त्याग में है, न कि हिंसा और घृणा में। इस प्रकार, पुण्य शुक्रवार केवल शोक का दिन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, सुधार और मानवता के मूल्यों को अपनाने का अवसर भी है। प्रभु यीशु की याद में पूरे दिन उपवास पर रहे ईसाई धर्मावलंबियों ने सूर्यास्त के बाद शाम में यीशु की पूजा के बाद शरबत एवं मीठी रोटी (बन) खाकर उपवास तोड़ा। गुड फ्राइडे के मौके पर स्टेशन रोड स्थित रोमन कैथोलिक चर्च मे आयोजित प्रार्थना सभा में बड़ी संख्या में ईसाई समाज के लोगों ने भाग लिया। सहायक पल्ली पुरोहित फादर जोसेफ ने ईसाइयों के पवित्र धर्म ग्रंथ बाइबल की चर्चा करते हुए कहा कि प्रभु ईसा मसीह क्रूस पर लटकाए जाने की घटना के तीन दिन बाद यानी ईस्टर संडे के दिन वे पुनः जीवित हो उठे थे। इस संडे को हम ईस्टर संडे के रूप में मानते है जो कैथोलिक ईसाइयों का सबसे महत्वपूर्ण और सबसे बड़ा त्योहार है। सभी ईसाई इस पर्व को हर्ष उल्लास के साथ खुशियां मनाते हैं। ईस्टर एग और मिठाइयां बांटने की परम्परा का पालन करते हैं। क्रुस यात्रा में सिस्टर एलसिट,होली क्रॉस स्कूल की प्रिंसिपल सिस्टर जैंसी,प्रबंधक सिस्टर नीली,स्टीफन सर्पिस, शिक्षाविद एस एम माइकल, संजीवन इक्का, दिलीप कुमार, राइफल गुड़िया, गेब्रियल दास, रज्जी चाको, सन्नी पीटर, फ्रांसी आदि समेत बड़ी संख्या में ईसाई धर्मावलम्बी शामिल थे। यीशु मसीह के आचरण और उनके क्रूस पर लटकाए जाने की घटना और पुनः जीवित होने की घटना पर नाटक का प्रदर्शन भी किया गया। परम प्रसाद भी वितरित किया गया। क्रुस यात्रा में येरूसलम के राजा पिलातुस की भूमिका लिरोय सरपीस, ईशा मसीह की भूमिका आशीष एवं सैनिकों की भूमिका में जॉन लाल, राज किशोर, संदीप, अमन, रोहित, विशाल एवं माता मरियम की सुरक्षा में रोशनी, नैंसी प्रकाश शारौन सरपीस एवं वेरोनिका ने सफल किरदार की भूमिका निभाई। सर्वप्रथम गैब्रियल एवं उसकी पत्नी निर्मला और पुत्र हेमंत ने अपने कंधे पर क्रुस लेकर यात्रा की शुरुआत की उसके बाद क्रुस उठाने वालों का ताँता लग गया। क्रूस यात्रा के झांकियां के 14 मुकाम यानी 14 स्थानो को कैथोलिक ईसाई विश्वासीगन परिवारों के साथ अपनी मन्नत के लिए क्रूस को ढोते हैं।
होली रोसरी कैथोलिक चर्च के जनसंपर्क अधिकारी स्टीवन जॉन सर्पिस ने बताया रविवार को ईस्टर संडे के रूप में मनाने की परंपरा है। जिसकी सभी तैयारियां भी शुरू कर दी गई है चर्च की सजावट का कार्य भी अंतिम चरण में है। उन्होंने बताया हम सभी इसी इस पर्व को हर्ष, उल्लास एवं खुशियों के साथ मनाते हैं और अपने परिजनों एवं मित्रों के बीच ईस्टर एग और मिठाईयाँ बाँटते हैं।