स्त्री और प्रकृति
स्त्री एवं प्रकृति, प्रकृति एवं स्त्री,
वास्तव में दोनों एक ही है,
परंतु भाव एवं रूप अनेक हैं,
स्त्री है मानव के अत्यंत निकट,
बोलती और सुनती हुई प्रकृति
और प्रकृति है मानव का पालन-पोषण करती हुई मूक स्त्री,
समाज में स्त्री जितनी स्वतंत्र होगी और शक्तिशाली होगी,
प्रकृति उतनी पुष्पित और पल्लवित होगी,
परंतु स्त्री के सशक्तीकरण का मतलब,
उच्छृंखलता या अराजकता नहीं है, सशक्तीकरण का मतलब है अनुशासन और काम-क्रोध-लोभ एवं मोह पर स्त्री की विजय,
इस हेतु ही करना होगा पुनः समाज का समुच्चय,
तभी राम राज्य होगा स्थापित,
जब प्रकृति पुत्र इस सिद्धांत को करेंगे क्रियान्वित…..
आशीष दीक्षित
