साहित्य

कविता : स्त्री और प्रकृति (आशीष दीक्षित)

स्त्री और प्रकृति स्त्री एवं प्रकृति, प्रकृति एवं स्त्री, वास्तव में दोनों एक ही है, परंतु भाव एवं रूप अनेक हैं, स्त्री है मानव के अत्यंत निकट, बोलती और सुनती हुई प्रकृति और प्रकृति है मानव का पालन-पोषण करती हुई मूक स्त्री, समाज में स्त्री जितनी स्वतंत्र होगी और शक्तिशाली होगी, प्रकृति उतनी पुष्पित और […]