विकसित बिहार से विकसित भारत की संकल्पना होगी साकार – कुलपति
कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में बिहार दिवस समारोह आयोजित
दरभंगा। कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के दरबार हॉल में बिहार दिवस के उपलक्ष्य में सोमवार को भव्य समारोह का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. लक्ष्मीनिवास पाण्डेय ने कहा कि विकसित बिहार से ही विकसित भारत की संकल्पना पूरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि बिहार की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक परंपरा देश के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है। उन्होंने युवाओं को अपने ज्ञान, कौशल और संस्कार के माध्यम से राज्य एवं राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। उक्त जानकारी देते हुए पीआरओ डॉ निशिकांत ने बताया कि कार्यक्रम के
मुख्य वक्ता चन्द्रशेखरेन्द्र विश्वविद्यालय, कांचीपुरम् के प्रो. नारायणजी झा ने कौटिल्य अर्थशास्त्र के उपधा चतुष्ट्य—धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष—की गहन व्याख्या की। उनके अनुसार, ये चारों तत्व भारतीय जीवन-दर्शन के आधार स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि इन मूल्यों का संतुलित समन्वय ही समाज और राष्ट्र के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।साथ ही बताया कि न्याय,मीमांसा, आदि काव्य रामायण आदि की रचना में मिथिला मनीषियों का महान योगदान रहा है।
वहीं, प्रास्ताविक उद्बोधन में कुलसचिव प्रो. ब्रजेशपति त्रिपाठी ने बिहार दिवस को बिहारी अस्मिता को बचाए रखने का उत्सव बताते हुए कहा कि यह दिन हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने और अपनी पहचान पर गर्व करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने बिहार की समृद्ध विरासत, भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण पर विशेष बल दिया। इसी क्रम में वेद-पुराण संकायाध्यक्ष प्रो.दिलीप कुमार झा ने बिहार की गौरवगाथा का विस्तार से चित्रण किया। समारोह के दौरान बिहार राज्य गीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गौरवशाली परंपराओं को जीवंत किया गया।
कार्यक्रम में आगत अतिथियों का पाग-चादर एवं पुष्पगुच्छ से सम्मानित किया गया। स्वागत भाषण करते हुए अध्यक्ष छात्र कल्याण प्रो.पुरेंद्र बारिक ने उन्नत शिक्षा, उज्ज्वल भविष्य की संकल्पना साकार करने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संचालन व्याकरण प्राध्यापक डॉ.रामसेवक झा तथा धन्यवाद ज्ञापन एनएसएस समन्वयक डॉ.सुधीर कुमार ने किया। कार्यक्रम में सीसीडीसी डॉ.दिनेश झा, वित्त पदाधिकारी डॉ.पवन कुमार झा, व्याकरण साहित्य संकायाध्यक्ष प्रो.दयानाथ झा, दर्शन विभागाध्यक्ष डॉ.धीरज पाण्डेय, डॉ.शम्भु शरण तिवारी, डॉ . नवीन कुमार झा, डॉ.नरोत्तम मिश्र, डॉ.यदुवीर स्वरूप शास्त्री, डॉ.अवधेश श्रोत्रिय, डॉ.रीतेश चतुर्वेदी, डॉ.साधना शर्मा,डॉ.वरुण कुमार झा, डॉ . सन्तोष कुमार तिवारी, गोपाल उपाध्याय, सुनील कुमार सिंह सहित दर्जनों छात्र -छात्राएं उपस्थित थे।
