डेस्क। तेहरान से 4000 किलोमीटर दूर डिएगो गार्सिया में अमेरिका और UK के एयरबेस पर ईरान के मिसाइल हमले के बाद ब्रिटेन बौखला गया है। इसके रिएक्शन में ब्रिटिश नौसेना की परमाणु पनडुब्बी ईरान पर हमले करने की रेंज में पहुंची चुकी है। यह खबर आने के बाद मिडिल-ईस्ट में हड़कंप मच गया है। ऐसे में यह आशंका जाहिर की जा रही है कि क्या अब ब्रिटेन भी सीधे इस युद्ध में शामिल हो जाएगा?…अगर ऐसे हुआ तो कहीं यह तीसरे विश्वयुद्ध की नींव तो नहीं रख देगा। फिलहाल ब्रिटेन के इस कदम ने मिडिल-ईस्ट में तनाव को और बढ़ा दिया है।
ब्रिटिश रॉयल नेवी ने परमाणु-संचालित पनडुब्बी एचएमएस एंसन को उत्तरी अरब सागर में तैनात कर दिया है। इसे ऐसे लोकेशन पर तैनात किया गया है, जहां से यह आसानी से ईरान पर लंबी दूरी के हमले कर सकती है। डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, यह पनडुब्बी टॉमहॉक ब्लॉक IV लैंड-अटैक क्रूज मिसाइलों से लैस है, जिनकी रेंज लगभग 1,609 किलोमीटर है। साथ ही इसमें स्पीयरफिश हेवीवेट टॉरपीडो भी हैं। सैन्य सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि एचएमएस एंसन 6 मार्च को ऑस्ट्रेलिया के पर्थ बंदरगाह से रवाना हुई थी और लगभग 5,500 मील की यात्रा के बाद उत्तरी अरब सागर के गहरे जलों में अपनी स्थिति ले रही है।
उत्तरी अरब सागर में ब्रिटिश परमाणु पनडुब्बी की तैनाती से ब्रिटेन को क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ने पर ईरान के ठिकानों पर क्रूज मिसाइल हमले करने की क्षमता मिल जाती है। यह कदम मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच आया है, जहां अमेरिका-इजरायल गठबंधन और ईरान के बीच सैन्य झड़पें तेज हो गई हैं। बता दें कि ईरान ने हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है, जिससे तेल और गैस की कीमतों में उछाल आया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने पिछले सप्ताह अमेरिका को ईरानी ठिकानों पर हमलों के लिए ब्रिटिश ठिकानों का उपयोग करने की अनुमति दी थी। इसके बाद ही ईरान ने शुक्रवार को संभवतः खोर्रमशहर-4 बैलिस्टिक मिसाइल से यूएस-यूके के ज्वाइंट मिलिट्री बेस को मिसाइल हमले से निशाना बनाया था।
ब्रिटेन की न्यूक्लियर सब-मरीन की उत्तरी अरब सागर में तैनाती के बाद यह आशंका तेज हो गई है कि क्या ब्रिटेन भी ईरान युद्ध में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होगा? रिपोर्ट में कहा गया है कि पनडुब्बी हर 24 घंटे में सतह पर आकर लंदन के पर्मानेंट जॉइंट हेडक्वार्टर्स (पीजेएचक्यू) से संपर्क करती है। किसी भी मिसाइल लॉन्च का आदेश ब्रिटिश प्रधानमंत्री द्वारा अधिकृत किया जाएगा और जॉइंट ऑपरेशंस के प्रमुख के माध्यम से पहुंचाया जाएगा। फिलहाल इस न्यूक्लियर सब-मरीन की तैनाती को ब्रिटेन के रणनीतिक तैयारियों का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि रॉयल नेवी अभी सतह के युद्धपोत भेजने से हिचक रही है, क्योंकि ईरान की ओर से खतरा ‘बहुत अस्थिर’ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका-ईरान संघर्ष मेंखासकर होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के संदर्भ में ब्रिटेन की भूमिका को मजबूत करने का संकेत है।
