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ईरान पर हमले को 21 दिन, मोदी सरकार चुप क्यों? जयराम रमेश ने दागे कई तीखे सवाल

डेस्क:कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शनिवार को केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद जारी संघर्ष पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया। उन्होंने सरकार के इस रुख को नैतिक कायरता और भारत के सभ्यतागत मूल्यों के साथ राजनीतिक विश्वासघात बताया। X पर एक पोस्ट में रमेश ने सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि ईरान पर हवाई हमले को तीन सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है। रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र ने न तो हमलों की निंदा की है और न ही क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए कोई राजनयिक पहल की है। उन्होंने लिखा कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हवाई हमले को शुरू हुए ठीक 21 दिन या तीन सप्ताह हो चुके हैं। प्रधानमंत्री की इजरायल यात्रा से लौटे भी 23 दिन हो चुके हैं। क्या मोदी सरकार ने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए इस भीषण हवाई हमले की निंदा, आलोचना या विरोध किया है, जिसके कारण भारत सहित हर जगह गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो गया है? जवाब है नहीं।

उन्होंने सवाल किया कि अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हवाई हमले शुरू हुए ठीक 21 दिन या तीन सप्ताह हो चुके हैं। प्रधानमंत्री की इज़राइल यात्रा से वापसी को भी 23 दिन हो चुके हैं, जिसका खूब प्रचार किया गया था। क्या मोदी सरकार ने इस भारी हवाई हमले की निंदा, आलोचना या विरोध किया है? उन्होंने आगे पूछा कि क्या मोदी सरकार ने अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के शीर्ष नेताओं की लक्षित हत्याओं की निंदा, आलोचना या निंदा की है, जो लगातार जारी हैं? जवाब है नहीं। क्या मोदी सरकार ने अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान में सत्ता परिवर्तन और राज्य के पतन के लिए किए जा रहे क्रूर प्रयासों की निंदा, आलोचना या निंदा की है, जिससे ईरान में गृहयुद्ध छिड़ सकता है? जवाब है नहीं। उन्होंने सवाल किया कि क्या मोदी सरकार ने ईरान पर बमबारी और खाड़ी देशों में ऊर्जा और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे पर ईरान के हमलों को तत्काल रोकने के लिए गंभीर राजनयिक प्रयास और पहल की हैं? क्या प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति और इज़राइली प्रधानमंत्री के साथ अपनी बहुचर्चित मित्रता का इस्तेमाल युद्धविराम कराने के लिए किया है? जवाब है नहीं। उन्होंने आगे कहा कि ये चारों ‘नहीं’ भारत के सभ्यतागत मूल्यों की नैतिक कायरता और राजनीतिक विश्वासघात को दर्शाते हैं।

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