डेस्क:हरियाणा में हाल ही में संपन्न हुए राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के भीतर आंतरिक कलह और अनुशासनात्मक कार्रवाई का दौर तेज हो गया है। पार्टी ने शुक्रवार को रतिया से विधायक जरनैल सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उन पर राज्यसभा चुनाव के दौरान ‘क्रॉस-वोटिंग’ और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का गंभीर आरोप है। क्या है मामला?
कांग्रेस की प्रदेश इकाई की अनुशासनात्मक कार्रवाई समिति ने यह नोटिस जारी किया है। समिति के अध्यक्ष धर्मपाल मलिक और सदस्य सचिव रोहित जैन ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है। इससे पहले, पार्टी ने राज्य के चार अन्य विधायकों—शैली चौधरी (नारायणगढ़), रेणु बाला (सधौरा), मोहम्मद इलियास (पुन्हाना) और मोहम्मद इसराइल (हथीन)- को भी इसी तरह के नोटिस जारी किए थे। पार्टी के आधिकारिक नोटिस के अनुसार, 16 मार्च 2026 को हुए चुनाव के दौरान जरनैल सिंह ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया, जिसके चलते उनका वोट अमान्य हो गया। संशोधित नोटिस में यह भी कहा गया है कि सिंह ने जानबूझकर कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार करमवीर सिंह बौद्ध के बजाय किसी अन्य उम्मीदवार का समर्थन किया, जो पार्टी अनुशासन का गंभीर उल्लंघन है। शुक्रवार शाम को जारी किए गए एक संशोधित नोटिस में आरोप लगाया गया कि सिंह ने जानबूझकर कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार के पक्ष में मतदान नहीं किया और इसके बजाय किसी अन्य उम्मीदवार का समर्थन किया। नोटिस में लिखा है, ‘‘पूर्व में भेजे गए नोटिस के क्रम में यह सूचित किया जाता है कि पार्टी नेतृत्व के संज्ञान में यह बात लाई गई है कि राज्यसभा (हरियाणा) के द्विवार्षिक चुनाव में आपने कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार करमवीर सिंह बौद्ध के पक्ष में अपना वोट नहीं डाला, जिनका नाम मतपत्र पर क्रमांक एक पर था और किसी अन्य उम्मीदवार के पक्ष में वोट डाला।’’ पार्टी ने कहा कि यह कृत्य ‘‘पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार को हराने के उद्देश्य से जानबूझकर किया गया प्रतीत होता है और यह पार्टी अनुशासन का गंभीर उल्लंघन है’’।
कांग्रेस ने ‘क्रॉस वोटिंग’ के आरोप में हरियाणा के एक और विधायक को नोटिस जारी किया
नोटिस में कहा गया है, ‘‘ऐसा आचरण पार्टी विरोधी गतिविधियों के समान है और पार्टी की एकता, अखंडता और वैचारिक प्रतिबद्धताओं को कमजोर करता है। यह पार्टी के रुख, नियमों और स्थापित मानदंडों का भी स्पष्ट उल्लंघन है।’’ सिंह को सात दिन के भीतर यह बताने को कहा गया है कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए। जरनैल सिंह ने फतेहाबाद में पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि यह कदम उन्हें बदनाम करने की कोशिश है और उन्होंने जोर देकर कहा कि उन्होंने प्रक्रिया के अनुसार अपना चिह्नित मतपत्र पार्टी के अधिकृत एजेंट भूपिंदर सिंह हुड्डा को दिखाया था। सिंह ने कहा, ‘‘मुझ पर लगाए जा रहे आरोपों से मुझे बहुत दुख हो रहा है। मेरा दिल टूट गया है। मैं पार्टी और हुड्डा साहब के प्रति बहुत वफादार रहा हूं, लेकिन आज मुझे यह इनाम मिला है।’’ हालांकि, बातचीत के दौरान सिंह ने भाजपा नेता मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि कई विपक्षी विधायक अपने निर्वाचन क्षेत्रों में काम पूरा करवाने के लिए मुख्यमंत्री से संपर्क करते हैं। सिंह ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री बहुत अच्छे इंसान हैं, वह सबकी बात बहुत धैर्य से सुनते हैं। अगर कोई विधायक उन्हें आमंत्रित करता है तो मुख्यमंत्री उनके घर जाते हैं।’’
उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री की पगड़ी पहनने की भी प्रशंसा की, जिसमें राज्य बजट पेश करते समय भी पगड़ी पहनना शामिल है। हरियाणा से राज्यसभा की दो सीट के लिए सोमवार को मतदान हुआ। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संजय भाटिया ने एक सीट आसानी से जीत ली, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार करमवीर सिंह बौध ने निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के खिलाफ कड़े मुकाबले में दूसरी सीट हासिल की। निर्वाचन अधिकारी द्वारा अमान्य घोषित किए गए पांच वोट में से चार कथित तौर पर कांग्रेस विधायकों द्वारा डाले गए थे।
बुधवार को पार्टी ने नारायणगढ़ की विधायक शैली चौधरी, सधौरा की विधायक रेणु बाला, पुन्हाना के विधायक मोहम्मद इलियास और हथीन के विधायक मोहम्मद इसराइल सहित चार विधायकों के नाम लिए थे, जिन पर आधिकारिक रुख का उल्लंघन करने का संदेह है। शैली चौधरी और रेणु बाला ने बृहस्पतिवार को इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि उनके नामों को अनावश्यक रूप से विवाद में घसीटा जा रहा है।
