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दुनिया की सबसे बड़ी गैस फील्ड LNG प्लांट पर ईरान का हमला, दागी मिसाइल, धू-धूकर जल उठा

डेस्क: मिडिल ईस्ट की जंग अब दुनिया की रसोई और अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गई है। ईरान ने एक दुस्साहसी कदम उठाते हुए कतर स्थित दुनिया की सबसे बड़ी प्राकृतिक गैस सुविधा, ‘रास लफ़ान’ (Ras Laffan) LNG कॉम्प्लेक्स पर सीधा मिसाइल हमला कर दिया है। इस हमले के बाद पूरे प्लांट में भीषण आग लग गई और आसमान काले धुएं के गुबार से भर गया। ‘कतर एनर्जी’ (QatarEnergy) ने इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि मिसाइल सीधे उनके महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर गिरी, जिससे भारी नुकसान हुआ है।

यह हमला न केवल कतर के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि इसने वैश्विक ऊर्जा बाजार में तहलका मचा दिया है। ईरान और अमेरिका-इज़रायल के बीच छिड़ी इस ‘Oil War’ ने अब उन देशों को भी अपनी चपेट में ले लिया है जो सीधे तौर पर इस सैन्य टकराव का हिस्सा नहीं थे। इस हमले के बाद दुनिया भर में गैस की किल्लत और कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी का डर पैदा हो गया है।

ईरान द्वारा कतर के ऊर्जा ठिकानों पर किए गए भीषण बैलिस्टिक मिसाइल हमलों के बाद, कतर ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए ईरानी दूतावास के कर्मचारियों को देश छोड़ने का अल्टीमेटम दे दिया है। दूसरी ओर, सऊदी अरब की राजधानी रियाद भी ईरान की मिसाइलों के निशाने पर रही, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध की लपटें और तेज हो गई हैं।

कतर का कड़ा प्रहार: ईरानी दूतावास खाली करने का आदेश

गैस फील्ड पर हुए हमले से तिलमिलाए कतर ने गुरुवार को एक बड़ा कूटनीतिक फैसला लिया। कतर के विदेश मंत्रालय ने ईरानी दूतावास में तैनात मिलिट्री और सिक्योरिटी अटैची समेत सभी संबंधित कर्मचारियों को ‘पर्सोना नॉन ग्रांटा’ (अवांछित व्यक्ति) घोषित कर दिया है। इन्हें महज 24 घंटे के भीतर कतर छोड़ने का आदेश दिया गया है। कतर का आरोप है कि ईरान ने उस पर एक साथ 5 बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर न केवल उसकी संप्रभुता का उल्लंघन किया है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा को भी गहरे संकट में डाल दिया है।

दुनिया की सबसे बड़ी गैस फील्ड ‘साउथ पार्स’ बनी जंग का अखाड़ा

इस ‘ऑयल वॉर’ की जड़ें तब और गहरी हो गईं जब इज़रायली वायुसेना ने ईरान के पेट्रोकेमिकल्स कॉम्प्लेक्स को निशाना बनाया। यह प्लांट दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस भंडार ‘साउथ पार्स’ का हिस्सा है। इस हमले के जवाब में ईरान की अर्ध-सरकारी एजेंसी ‘तस्नीम’ ने पुष्टि की कि तेहरान ने पहले ही सऊदी अरब, यूएई और कतर को अपने ऊर्जा केंद्रों को खाली करने की चेतावनी दी थी। ईरान का तर्क है कि वह अपने संसाधनों पर हुए हमले का बदला खाड़ी में मौजूद अमेरिकी प्रभाव वाले क्षेत्रों से लेगा।

रियाद की सुरक्षा दीवार ने रोकी तबाही

ईरान की मिसाइलों का रुख सिर्फ कतर तक सीमित नहीं रहा। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ईरान की ओर से राजधानी रियाद की तेल सुविधाओं को निशाना बनाकर चार घातक बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। हालांकि, सऊदी एयर डिफेंस सिस्टम ने मुस्तैदी दिखाते हुए इन मिसाइलों को हवा में ही इंटरसेप्ट कर लिया। मिसाइलों का मलबा शहर के अलग-अलग रिहायशी इलाकों में गिरने से कम से कम चार लोग घायल हुए हैं। सऊदी अधिकारियों ने इसे नागरिक ठिकानों पर सीधा हमला करार दिया है।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य की घेराबंदी और वैश्विक संकट

बता दें कि अब दुनिया की तेल सप्लाई की सबसे महत्वपूर्ण नस मानी जाने वाली ‘होर्मुज़ जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) अब लगभग एक युद्ध क्षेत्र में बदल चुकी है। ईरान ने इस जलमार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए रास्ते बंद कर दिए हैं। इसके परिणामस्वरूप भारत, तुर्की और कई अन्य देशों को होने वाली तेल और गैस की सप्लाई बाधित हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्थिति पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लग चुकी है।

बाजार में हाहाकार: $110 के करीब पहुंचा कच्चा तेल

इस ‘ऑयल वॉर’ का सीधा प्रहार आम आदमी की जेब पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय मानक ‘ब्रेंट क्रूड’ की कीमतें देखते ही देखते 6% उछलकर 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। युद्ध की शुरुआत से अब तक कीमतों में 50% तक का इजाफा दर्ज किया गया है। जानकारों का मानना है कि अगर ऊर्जा ठिकानों पर हमले नहीं रुके, तो वैश्विक स्तर पर महंगाई का एक ऐसा तूफान आएगा जिसे संभालना किसी भी देश के लिए मुश्किल होगा।

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