डेस्क: अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) ने सैन्य तकनीक (Military Technology) के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाते हुए सात प्रमुख टेक कंपनियों (Tech companies) के साथ समझौता किया है। इस डील के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल्स को पेंटागन के क्लासिफाइड नेटवर्क में शामिल किया जाएगा। इस समझौते को वैश्विक सैन्य रणनीति में बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है।
इस हाई-प्रोफाइल करार में SpaceX, OpenAI, Google, Microsoft, NVIDIA, Amazon Web Services और Reflection AI जैसी कंपनियां शामिल हैं। वहीं Anthropic को इसमें जगह नहीं मिली, जिसे पहले ही ट्रंप प्रशासन द्वारा ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई को सीधे सैन्य क्षमताओं से जोड़ने का यह कदम रूस, चीन और भारत सहित दुनिया की प्रमुख सेनाओं को सतर्क करेगा। भविष्य के युद्धों में तकनीकी बढ़त और त्वरित निर्णय क्षमता निर्णायक साबित हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन में Baidu, Alibaba, Tencent और Huawei पहले से ही एआई को रक्षा क्षेत्र से जोड़ने की दिशा में काम कर रही हैं।
एआई-फर्स्ट फोर्स की ओर कदम
पेंटागन के अनुसार, इन एआई टूल्स का उपयोग कानूनी और ऑपरेशनल जरूरतों के तहत किया जाएगा। इसका मकसद अमेरिकी सेना को “एआई-फर्स्ट फाइटिंग फोर्स” में बदलना है, ताकि जमीन, समुद्र, वायु, अंतरिक्ष और साइबर जैसे सभी क्षेत्रों में तेज और सटीक फैसले लिए जा सकें।
एंथ्रोपिक क्यों हुआ बाहर?
अब तक Anthropic का क्लॉड मॉडल पेंटागन के क्लासिफाइड नेटवर्क में मौजूद एक प्रमुख एआई सिस्टम था। लेकिन Donald Trump प्रशासन ने कंपनी से दूरी बना ली, क्योंकि उसने अपने एआई सिस्टम को स्वायत्त हथियार और व्यापक निगरानी जैसे सभी उपयोगों के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
भारत के लिए नए मौके
इस वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत के लिए भी नए अवसर बन सकते हैं। Tata Group, Reliance Jio Platforms, Infosys, HCLTech और Tech Mahindra जैसी कंपनियां रक्षा एआई क्षेत्र में अपनी भूमिका मजबूत कर सकती हैं। इसके अलावा सरकारी पहलें जैसे iDEX और DRDO इस दिशा में अहम योगदान दे सकती हैं।
विश्लेषकों के अनुसार, यह नई होड़ आने वाले समय में वैश्विक सैन्य संतुलन को बहुध्रुवीय बना सकती है, जहां एआई तकनीक सबसे बड़ा निर्णायक कारक होगी।

