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ईरान की अमेरिका को कड़ी चेतावनी: बिजली ढांचे पर हमला हुआ तो अमेरिकी सैनिक बनेंगे निशाना

डेस्क: वाशिंगटन। ईरान और अमेरिका (Iran –United States) के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के वरिष्ठ नेता अली लारीजानी (Ali Larijani) ने अमेरिका को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ईरान की बिजली आपूर्ति प्रणाली पर हमला करता है, तो तेहरान पूरे क्षेत्र के बिजली ग्रिड को निशाना बना सकता है और अमेरिकी सैनिकों को भी टारगेट बनाया जाएगा।

लारीजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि अगर ईरान के बिजली ढांचे पर हमला हुआ तो पूरे क्षेत्र में आधे घंटे से भी कम समय में अंधेरा छा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में भाग रहे अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाना आसान हो जाएगा।

ट्रंप के बयान के बाद बढ़ा तनाव

लारीजानी की यह चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के हालिया बयान के बाद आई है। ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान संघर्ष को बढ़ाता है तो अमेरिका एक घंटे के भीतर ईरान की बिजली व्यवस्था को पूरी तरह तबाह कर सकता है।

ट्रंप के मुताबिक, “हम चाहें तो एक घंटे में उनकी बिजली आपूर्ति प्रणाली को ध्वस्त कर सकते हैं और उसे दोबारा खड़ा करने में उन्हें 25 साल लग सकते हैं।” हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ऐसा कदम उठाना नहीं चाहता, लेकिन जरूरत पड़ने पर पीछे नहीं हटेगा।

पहले भी दे चुके हैं धमकी

इससे पहले भी Ali Larijani ने ट्रंप को लेकर तीखा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि ट्रंप को “खत्म” किया जा सकता है। उन्होंने पोस्ट में लिखा था कि आपसे कहीं ज्यादा ताकतवर लोग भी ईरान को खत्म नहीं कर सके, इसलिए सावधान रहें कि कहीं आप खुद ही समाप्त न हो जाएं।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी चेतावनी

दूसरी ओर Donald Trump ने भी Mojtaba Khamenei और ईरान को लेकर कड़ा रुख दिखाया है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान Strait of Hormuz से तेल आपूर्ति रोकने की कोशिश करता है, तो अमेरिका पहले से बीस गुना ज्यादा कठोर जवाब देगा।

कौन हैं अली लारीजानी?

Ali Larijani ईरान की राजनीति के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। वे परमाणु वार्ताओं, क्षेत्रीय कूटनीति और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े कई अहम मामलों में भूमिका निभा चुके हैं।

अमेरिका ने इसी साल जनवरी में सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर कथित सख्ती के आरोपों के चलते लारीजानी पर प्रतिबंध भी लगाए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ती बयानबाजी से पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है।

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