डेस्क: ईरान (Iran) के मौजूदा नेतृत्व ने देश के नए सर्वोच्च नेता के रूप में मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) को चुना है। वे पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) के उत्तराधिकारी माने जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला इस बात का संकेत है कि ईरान ने अमेरिका (America) के साथ समझौते के बजाय टकराव की नीति को प्राथमिकता दी है।
ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में सुप्रीम लीडर का पद सबसे शक्तिशाली माना जाता है। विदेश नीति, रक्षा नीति और परमाणु कार्यक्रम जैसे अहम फैसलों पर अंतिम अधिकार इसी पद के पास होता है। साथ ही वह निर्वाचित राष्ट्रपति और संसद का मार्गदर्शन भी करता है, इसलिए देश में राष्ट्रपति से भी अधिक शक्तियां सुप्रीम लीडर के पास होती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार मोजतबा की नियुक्ति अमेरिका के लिए भी बड़ा झटका मानी जा रही है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले उन्हें “कमजोर नेता” बताते हुए खारिज किया था और यह भी माना जा रहा था कि सुप्रीम लीडर के चयन में अमेरिका अपनी भूमिका चाहता था।
रिपोर्टों के मुताबिक युद्ध के शुरुआती चरण में अमेरिका और इजरायल के हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान ने उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को उत्तराधिकारी बनाकर सत्ता में कट्टरपंथी धड़े की पकड़ को और मजबूत कर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम अमेरिका और इजरायल के साथ जारी तनाव को और बढ़ा सकता है, जिसका असर पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र से आगे तक पड़ सकता है।
अमेरिका के लिए बड़ा संदेश
मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो एलेक्स वटांका के अनुसार इतने बड़े सैन्य अभियान और जोखिम के बाद यदि अंत में सत्ता फिर उसी विचारधारा के हाथ में चली जाए, तो यह अमेरिका के लिए एक तरह की बड़ी राजनीतिक चुनौती है।
विश्लेषकों का कहना है कि मोजतबा खामेनेई का चयन एक स्पष्ट संदेश देता है कि ईरान फिलहाल समझौते के मूड में नहीं है। मोजतबा की पत्नी, मां और परिवार के अन्य सदस्य भी अमेरिकी-इजरायली हमलों में मारे गए थे, जिससे उनके रुख के और सख्त होने की संभावना जताई जा रही है।
मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के ही वरिष्ठ फेलो पॉल सलेम के मुताबिक मोजतबा के नेतृत्व में ईरान के लिए आने वाले दिन चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। उनका मानना है कि मोजतबा ऐसे नेता नहीं हैं जो अमेरिका के साथ आसानी से कूटनीतिक समझौते की दिशा में कदम बढ़ाएं।
वहीं पूर्व अमेरिकी राजनयिक और ईरान विशेषज्ञ एलन आयर का कहना है कि मोजतबा अपने पिता से भी ज्यादा कठोर और कट्टरपंथी माने जाते हैं और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के भी पसंदीदा उम्मीदवार रहे हैं।
56 वर्षीय धर्मगुरु मोजतबा ने शिया इस्लाम की पढ़ाई ईरान के कोम शहर के धार्मिक शिक्षण संस्थानों में की है। उन्हें “हुज्जतुल इस्लाम” की धार्मिक उपाधि प्राप्त है, जो शिया धर्म में एक उच्च स्तर का दर्जा माना जाता है।
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने वर्ष 2019 में मोजतबा पर प्रतिबंध भी लगाया था। अमेरिका का आरोप था कि बिना किसी आधिकारिक सरकारी पद के भी वे अपने पिता के प्रतिनिधि की तरह काम करते हुए सत्ता के अहम फैसलों को प्रभावित करते थे।
इस समय ईरान आर्थिक संकट से भी जूझ रहा है। देश में महंगाई, मुद्रा का गिरता मूल्य और बढ़ती गरीबी बड़ी चुनौती बनी हुई है। साथ ही सरकार की सख्त नीतियों के कारण जनता में असंतोष और विरोध प्रदर्शन भी बढ़े हैं। ऐसे हालात में माना जा रहा है कि मोजतबा खामेनेई के सामने कड़ा रुख अपनाने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं होंगे, चाहे युद्ध समाप्त ही क्यों न हो जाए।
