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ईरान ने जॉर्डन में तैनात अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम THAAD को किया ध्वस्त

डेस्क: ईरान (Iran) ने अरब प्रायद्वीप (Arabian Peninsula) में स्थित कई महत्वपूर्ण सैन्य अड्डों पर सटीक हमले कर अमेरिकी निर्मित रडार सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचाया है. सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार, जॉर्डन के मुवाफ्फाक साल्टी एयर बेस पर तैनात अमेरिकी ‘थार’ (THAAD) मिसाइल बैटरी का रडार पूरी तरह नष्ट हो गया है. इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब के सैन्य ठिकानों पर भी रडार वाली बिल्डिंग को निशाना बनाया गया है. ईरान का मुख्य उद्देश्य आने वाली मिसाइलों और ड्रोन्स का पता लगाने वाले इन आधुनिक रडार को खत्म कर एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट करना है.

जॉर्डन के मुवाफ्फाक साल्टी एयर बेस पर हुआ हमला सबसे विनाशकारी रहा है. ये बेस ईरान से लगभग 500 मील दूर स्थित है और अमेरिका के लिए एक बड़ा केंद्र रहा है. लड़ाई शुरू होने से पहले ली गई तस्वीरों में रनवे पर 50 से ज्यादा जेट, ड्रोन और परिवहन विमान खड़े थे. पर अब सैटेलाइट इमेज में रडार के पास 13 फीट के दो बड़े गड्ढे दिखाई दे रहे हैं, जिससे पता चलता है कि इसे नष्ट करने की कोशिश की गई.

नष्ट हुआ THAAD मिसाइलों के लिए रडार प्रणाली AN/TPY-2 पोर्टेबल रडार है, जिसका निर्माण रेथियॉन कंपनी द्वारा किया जाता है. जिसकी कीमत लगभग आधा अरब डॉलर (50 करोड़ डॉलर) है. ये रडार सिस्टम पांच 40 फुट लंबे ट्रेलरों में फैला हुआ है जो अब पूरी तरह से क्षतिग्रस्त या मलबे में तब्दील हो गया है.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ये रडार और थार बैटरी को फरवरी में तैनात किया गया था और ऐसा मालूम होता है कि इन रडारों पर 1 या 2 मार्च हो हमला हुआ है.

जॉर्डन तक समिति नहीं हैं हमले

रिपोर्ट में बताया गया है कि हमलों का सिलसिला केवल जॉर्डन तक सीमित नहीं है. एक मार्च की सैटेलाइट तस्वीरों में सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस के पास एक रडार साइट से धुआं उठता हुआ देखा गया. हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों से इस नुकसान पर आधिकारिक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.

संयुक्त अरब अमीरात में रुवैस और सादेर के पास स्थित सैन्य प्रतिष्ठानों को भी 28 फरवरी और 1 मार्च के बीच निशाना बनाया गया. रुवैस में कम से कम तीन और सादेर में चार इमारतों को नुकसान पहुंचा है.

सीएनएन (CNN) की रिपोर्ट के अनुसार, इन जगहों पर थार बैटरी और रडार सिस्टम स्टोर किए जाते थे. सैटेलाइट फुटेज में उन शेड्स को क्षतिग्रस्त दिखाया गया है, जहां रडार सिस्टम रखे जाते थे. यूएई के पास अपनी दो थार बैटरियां हैं, जबकि अमेरिका भी वहां अपनी यूनिट्स संचालित करता है, लेकिन फिलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि नुकसान किसका ज्यादा हुआ है.

हथियार विशेषज्ञ एन.आर. जेनजेन-जोन्स के अनुसार, AN-TPY/2 रडार असल में थार बैटरी का ‘हार्ट’ है. ये रडार ही इंटरसेप्टर मिसाइलों को लॉन्च करने और हवाई खतरों की तस्वीर साफ करने में मदद करता है. उन्होंने कहा कि एक भी रडार का नुकसान एक महत्वपूर्ण परिचालन घटना है, क्योंकि इसे आसानी से बदला नहीं जा सकता. रिप्लेसमेंट यूनिट को कहीं और से मंगाने में काफी वक्त और प्रयास लगेगा. हालांकि, रडार के बिना सिस्टम पूरी तरह बेकार नहीं होता, लेकिन इसकी सुरक्षा करने और बड़े क्षेत्र की रक्षा करने की क्षमता गंभीर रूप से घट जाती है.

‘अर्ली वार्निंग को भी भारी नुकसान’

बताया जा रहा है कि THAAR ही नहीं, बल्कि कतर के उम्म दहल में स्थित अमेरिकी निर्मित ‘अर्ली वार्निंग’ रडार सिस्टम को भी नुकसान पहुंचने की खबरें हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने जानबूझकर संचार, रडार और खुफिया उपकरणों को निशाना बनाया है, ताकि अमेरिकी ठिकानों का बाहरी दुनिया से संपर्क कट जाए.
पेंटागन के प्रवक्ता ने परिचालन सुरक्षा का हवाला देते हुए विशिष्ट क्षमताओं की स्थिति पर टिप्पणी करने से मना कर दिया है. मिडिल ईस्ट में मौजूद ये रडार अमेरिका और उसके सहयोगियों की सुरक्षा की पहली पंक्ति थे, जो अब खतरे में हैं.
वहीं, हवाई हमलों के बीच यूएई के आसमान में लड़ाकू विमानों की सक्रियता बढ़ गई है. फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरोट ने पुष्टि की है कि फ्रांस ने यूएई में अपने सैन्य अड्डों की रक्षा के लिए राफेल लड़ाकू विमान तैनात किए हैं.

UAE पर दागी 137 मिसाइलें

यूएई ने बताया कि शनिवार को युद्ध के पहले दिन 137 मिसाइलें दागी गई थीं जो गुरुवार तक घटकर केवल सात रह गई हैं. हालांकि, बैलिस्टिक मिसाइलों की संख्या घटी है, लेकिन ड्रोन हमलों अभी भी जारी हैं. ईरान की ओर से अबतक यूएई पर 1,072 ड्रोन और 196 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी जा चुकी हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि थार जैसे सिस्टम को पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली के साथ जोड़कर सुरक्षा की परतें बनाई जाती हैं. ईरान की वर्तमान रणनीति इन परतों को भेदने की है, अगर रडार नेटवर्क ध्वस्त हो जाता है तो मिसाइल डिफेंस सिस्टम बिना किसी हिसाब के काम करने लगता है. ईरान के इस कदम ने अमेरिका को रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है. अब चुनौती ये है कि इन महंगे और दुर्लभ रडार सिस्टम को कितनी जल्दी बदला जा सकता है, क्योंकि युद्ध लंबा खींचने के आसार हैं और हवाई हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं.

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