डेस्क: बुधवार को वैश्विक संकेतों की कमजोरी और ईरान-अमेरिका संघर्ष के तेज होने से उत्पन्न आर्थिक चिंताओं के बीच शेयर बाजार में तेज गिरावट देखी गई। शुरुआती कारोबार में ही बेंचमार्क सूचकांक BSE Sensex 1,687.58 अंक यानी 2.10% गिरकर 78,551.27 पर पहुंच गया। वहीं Nifty 50 487.90 अंक फिसलकर 24,377.80 पर कारोबार करता दिखा। लार्सन & टुब्रो (L&T) का शेयर करीब 6% तक फिसल गया।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में लंबे समय तक युद्ध की आशंका से निवेशकों में सतर्कता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा है।
भारत अपनी करीब 85% कच्चे तेल की जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। ऐसे में तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि से देश का व्यापार घाटा बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव आ सकता है और महंगाई तेज हो सकती है। इसका सीधा असर आर्थिक वृद्धि और कॉरपोरेट आय पर पड़ सकता है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी. के. विजयकुमार ने कहा कि युद्ध के तेज होने और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण बाजार में अनिश्चितता का दौर शुरू हो गया है।
उन्होंने कहा, “किसी को नहीं पता कि यह संघर्ष कितने समय तक चलेगा और इसका असर कितना व्यापक होगा। भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता महंगाई और आर्थिक विकास पर इसका प्रभाव है।”
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि युद्ध लंबा चलता है तो व्यापार घाटा बढ़ने, रुपये में कमजोरी, महंगाई में उछाल और विकास दर में गिरावट जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं, जिससे कंपनियों की कमाई प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, विजयकुमार ने निवेशकों को घबराहट में फैसले लेने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बाजार अनिश्चित परिस्थितियों में भी उबरने की क्षमता रखता है। उन्होंने सुझाव दिया कि लंबी अवधि के निवेशक और अधिक जोखिम उठाने की क्षमता रखने वाले निवेशक इस गिरावट को अच्छे शेयरों में निवेश के अवसर के रूप में देख सकते हैं। बैंकिंग, फार्मा, ऑटोमोबाइल और रक्षा क्षेत्र में लंबी अवधि के लिए निवेश के अवसर बन सकते हैं।
