डेस्क: पश्चिम एशिया के दहकते अंगारों के बीच ईरान से एक ऐसी खबर आई है जिसने दुनिया भर के भू-राजनीतिक समीकरणों को हिलाकर रख दिया है। पिछले कुछ दिनों से ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने उस वक्त एक नया मोड़ ले लिया जब अमेरिका और इजरायल के एक संयुक्त सैन्य हमले में ईरान के सबसे ताकतवर शख्सियत और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की जान चली गई।
28 फरवरी की उस विनाशकारी रात को हुए हमले के बाद से ही ईरान में नेतृत्व का संकट बना हुआ था, जिसे अब आधिकारिक तौर पर सुलझा लिया गया है। ईरान की ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक के बाद अयातुल्ला अली खामेनेई के 56 वर्षीय पुत्र, मोजतबा खामेनेई को देश का नया ‘सुप्रीम लीडर’ घोषित कर दिया है।
यह सत्ता परिवर्तन एक ऐसे दौर में हुआ है जब पूरा क्षेत्र बारूद के ढेर पर बैठा है। 28 फरवरी को हुए उस जोरदार हमले के जवाब में ईरान ने भी अपनी पूरी सैन्य शक्ति झोंक दी है। ईरान की ओर से की गई जवाबी कार्रवाई में खाड़ी के सात अलग-अलग देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसके कारण मिडिल ईस्ट में तनाव अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया है।
‘ईरान इंटरनेशनल’ समेत कई वैश्विक मीडिया संस्थानों की रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान के भविष्य का फैसला करने वाली 88 वरिष्ठ मौलवियों की सभा ने मोजतबा खामेनेई के नाम पर मुहर लगाई है। अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मोजतबा के नेतृत्व में ईरान इस भीषण युद्ध और इजरायल-अमेरिका की चुनौती का सामना किस तरह करता है।
