डेस्क: दक्षिण एशिया (South Asia) में भू-राजनीतिक तनाव ने खतरनाक मोड़ ले लिया है। शुक्रवार सुबह अफगानिस्तान (Afghanistan) के इस्लामिक अमीरात के रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) ने दावा किया कि उसकी वायुसेना ने पाकिस्तान (Pakistan) की सीमा के भीतर घुसकर कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इस दावे के बाद दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव और गहरा गया है।
रक्षा मंत्रालय का दावा और निशाने पर रहे ठिकाने
रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह हवाई कार्रवाई सुबह लगभग 11 बजे की गई। तालिबान के लड़ाकू विमानों ने इस्लामाबाद के पास फैजाबाद स्थित एक सैन्य शिविर, नौशेरा में सैन्य मुख्यालय, जमरुद की सैन्य टाउनशिप और एबटाबाद जैसे रणनीतिक इलाकों को निशाना बनाया। मंत्रालय के प्रवक्ता इनायतुल्ला ख्वारज्मी ने अभियान को पूरी तरह सफल बताते हुए कहा कि पाकिस्तान सेना के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण केंद्रों और सुविधाओं को ध्वस्त कर दिया गया है।
प्रतिशोध की कार्रवाई बताई
तालिबान प्रशासन ने इस हमले को जवाबी कदम करार दिया है। मंत्रालय का आरोप है कि पिछले कुछ समय से पाकिस्तानी सेना अफगान हवाई क्षेत्र का उल्लंघन कर रही थी और सीमा पार हमले कर रही थी। इन्हीं कथित घटनाओं के प्रतिशोध में यह कार्रवाई की गई।
अफगान सेना प्रमुख फसीहुद्दीन फितरत ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि दोबारा कोई सैन्य गतिविधि हुई तो उसका और भी कठोर जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान किसी भी आक्रामकता को बर्दाश्त नहीं करेगा और जरूरत पड़ी तो इस्लामाबाद समेत अन्य प्रमुख शहरों को भी निशाना बनाया जा सकता है।
सीमा पर भारी हथियारों की तैनाती
सूत्रों के अनुसार, अफगान सेना ने सीमावर्ती क्षेत्रों में टैंक और हल्के व भारी हथियारों की तैनाती बढ़ा दी है। संभावित जवाबी कार्रवाई की स्थिति में इनके इस्तेमाल के निर्देश भी दिए गए हैं।
विश्लेषक अब्दुल सादिक हामिदजोय का कहना है कि मुजाहिदीन को दशकों का युद्ध अनुभव है और वे आधुनिक सैन्य चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हैं। वहीं विशेषज्ञ शाहजादा मसूद ने कहा कि अफगानिस्तान युद्ध का पक्षधर नहीं है, लेकिन मौजूदा हालात ने उसे कठोर कदम उठाने पर मजबूर किया है।
क्षेत्रीय स्थिरता पर खतरा
काबुल और इस्लामाबाद के बीच यह सीधी सैन्य टकराव की स्थिति वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा रही है। दोनों देश पहले भी एक-दूसरे पर आतंकवाद को पनाह देने और सीमा उल्लंघन के आरोप लगाते रहे हैं। जानकारों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो यह टकराव व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है।
फिलहाल पाकिस्तान की ओर से संभावित नुकसान को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सीमा पर दोनों देशों की सेनाएं उच्च सतर्कता पर हैं।
