
दरभंगा। जनता की शीघ्र समस्याओं के निदान पर सरकार द्वारा लगाई गई रोक, आपकी नजरों में कितना सही और कितना गलत है उक्त बाते प्रमंडलीय पार्षद महासंघ, दरभंगा प्रमंडल बिहार के अध्यक्ष सह वार्ड 13 के पार्षद, राजीव सिंह ने कहा मै मिडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से बिहार सरकार एवं नगर विकास एवं आवास मंत्री से यह पूछना चाहता हूं कि नगर निकायों के पार्षदों या पंचायतीराज के अंतर्गत चुने गए जनप्रतिनिधियों को जब तक मजबूत नहीं किए जाएंगे तब तक सरकार की नीति और योजना का क्रियान्वयन सही रूप से नहीं किया जा सकता है । आप विधानसभा में एक तरफ छोटे जनप्रतिनिधियों को अधिकार देने की बात करते हैं और एक ओर नगर निकाय के पार्षदों का कार्य योजना की क्षमता को घटाने का प्रयास भी कर रहे हैं। क्या यह दोहरी नीति प्रजातंत्र के अनुकूल नहीं प्रतीत होता है। मै आपसे आग्रह पूर्वक निवेदन करते है के तुगलकी फरमान नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा 15 लाख से कम योजना का भी क्रियान्वयन ई टेंडर के माध्यम से कराये जाने का आदेश पत्र प्रत्येक नगर निकाय को भेजा गया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि एक टेंडर की प्रक्रिया इतनी जटिल है की नियम संगत करते-करते कम से कम सात से आठ महीने लग जाते हैं। 15 लाख से नीचे की योजना से छोटे छोटे जनहित में कार्य का क्रियान्वयन किया जाता रहा है यह शहर जमीन पर कार्य दिखता भी था। मैं एक उदाहरण स्वरूप कहना चाहता हूं के यदि किसी भारी वाहन से किसी गली मोहल्ले का कल्वर्ट (सलैब) टूट गया अब उस टूटे हुए कल्बर्ट का निर्माण करने के लिए टेंडर की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। टेंडर होगा टेंडर खुलने का समय दिया जाएगा और यह कोई जरूरी नहीं है कि टेंडर की प्रक्रिया एक वार में ही संपन्न हो जाए यदा कदा टेंडर में कभी-कभी संवेदक टेंडर नहीं भर पाते हैं तो आप समझ सकते हैं की कितनी व्यवधान उत्पन्न होगा उस छोटे से कल्वर्ट को बनाने के लिए तब तक छोटे प्रतिनिधि की दुर्दशा समाज में कैसा प्रतीत होगा यह महसूस करने की जरूरत है। क्योंकि जनता के बीच में हमेशा रूबरू होना पड़ता है वह लाचार, विवश, बेसहारा पार्षद जनता की गाली उपहार स्वरूप सुनकर उनकी समस्याओं का निदान चाहकर भी तत्काल नहीं करा सकेंगे। यह तुगलकी फरमान का असर होगा जिसमें सामाजिक समरसता बिगड़ सकती इस पर पुनर्विचार करते हुए इस तुगलक फरमान को निरस्त करने का निर्णय लेने की जरूरत है।