डेस्क:बदलते युद्धक्षेत्र, चालाक पड़ोसी और टेक्नोलॉजी से लैस दुश्मन, इन सबके बीच अब पुराने ढर्रे की सोच से काम नहीं चलने वाला। यही वजह है कि रक्षा अधिग्रहण परिषद ने भारतीय वायुसेना के लिए एयर-शिप बेस्ड हाई-एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट (AS-HAPS) खरीदने की आवश्यकता को मंजूरी दी है। यह फैसला भारत की सुरक्षा सोच में आए बड़े बदलाव का ऐलान है। करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये के विशाल पूंजीगत रक्षा पैकेज के भीतर आई यह मंजूरी साफ बताती है कि भारत अब निगरानी और खुफिया क्षमता को युद्ध जीतने का असली हथियार मान चुका है। राफेल लड़ाकू विमान और मिसाइलें दुश्मन पर प्रहार करेंगी, लेकिन AS-HAPS दुश्मन की हर हरकत पर ऐसी नजर रखेगा कि उसके लिए छिपना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। अब सवाल यह है कि आखिर यह HAPS है क्या, जिसके लिए इतना उत्साह है? सरल भाषा में कहें तो यह “आसमान में टंगा चौकीदार” है। ये सौर ऊर्जा से चलने वाले मानव रहित विमान होते हैं, जो धरती से लगभग 18–20 किलोमीटर की ऊंचाई पर समताप मंडल में महीनों तक टिके रह सकते हैं। जहां आम यात्री विमान उड़ते हैं, उससे लगभग दोगुनी ऊंचाई पर यह रहते हैं। यानी न नीचे का ट्रैफिक, न मौसम की सामान्य बाधाएं, बस लगातार निगरानी होती रहेगी।
