– पूज्य ब्रह्मचारी श्री कौशिक चैतन्य जी महाराज होंगे कथा व्यास
– आगामी 22 फरवरी को निकलेगी कलश यात्रा और एक मार्च को होगा विशाल भण्डारा

लखनऊ। विश्व के इकलौते 51 शक्तिपीठ मन्दिर, बीकेटी में आगामी 22 से 28 फ़रवरी 2026 मध्य श्रीमद भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा व्यास पूज्य ब्रह्मचारी श्री कौशिक चैतन्य जी महाराज हैं।
श्रीमद भागवत कथा की तैयारियों में जुटे मन्दिर के संस्थापक सदस्य नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान ने बताया कि श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का समय दोपहर एक से चार बजे तक रहेगा। आगामी 22 फरवरी को 11 बजे गुरुद्वारा के निकट शिव मंदिर से कलश यात्रा का शुभारंभ होगा। जबकि कथा के समापन पर एक मार्च की दोपहर से प्रभु की इच्छा तक विशाल भंडारा आयोजित होगा।
इस धार्मिक अनुष्ठान की प्रेरणा स्मृति शेष ब्रह्मलीन पंडित रघुराज दीक्षित (संस्थापक 51 शक्तिपीठ तीर्थ) एवं उनके 24 वर्षीय इकलौते ब्रह्मलीन सुपुत्र आशीष दीक्षित से मिली है। यह कथा राजधानी से 15 किमी दूर सीतापुर रोड के किनारे स्थित 51 शक्तिपीठ तीर्थ (नन्दन वन) बख्शी का तालाब में होगी।

चौहान के मुताबिक, इस धार्मिक अनुष्ठान के आयोजक वरद तिवारी हैं, जबकि कथा की मुख्य यजमान पुष्पा दीक्षित हैं। मन्दिर ट्रस्ट की अध्यक्ष तृप्ति तिवारी ने अपनी टीम के साथ इस कथा से जन-जन को जोड़ने का बीड़ा उठाया है। वह लगातार लखनऊ के शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के सनातनियों से डोर-टू-डोर सम्पर्क और संवाद कर रही हैं।
विश्व में इकलौता है 51शक्तिपीठ मन्दिर
51शक्तिपीठ तीर्थ के परिकल्पनाकार और संस्थापक युगऋषि ब्रह्मलीन पं. रघुराज दीक्षित ‘मंजु’ “शाक्त परम्परा” में 51 शक्तिपीठों का स्थान सर्वोपरि है। इन शक्तिपीठों के एकीकृत आस्था-स्थल 51 शक्तिपीठ तीर्थ के परिकल्पनाकार और संस्थापक परमपूज्य ब्रह्मलीन पं. रघुराज दीक्षित ‘मंजु’ का योगदान अत्यंत विशिष्ट और पावन है। 51 शक्तिपीठ तीर्थ देवी उपासकों, साधकों और श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का केन्द्र है। इस तीर्थ की स्थापना कर उन्होंने शाक्त-मत संदर्भित नव-चिन्तन को वृहद आयाम प्रदान किए हैं।
इक्यावन शक्तिपीठ मन्दिर ट्रस्ट की अध्यक्ष तृप्ति तिवारी ने विश्व के इकलौते 51 शक्तिपीठ मन्दिर की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि शाक्त-चिन्तन, प्रवर्तन और अनुसंधान की समन्वित सार्थक त्रयी को आत्मसात कर अग्रचेता पं. रघुराज दीक्षित ‘मंजु’ शक्ति की सुगम एवं लोक-कल्याणी साधना-उपासना पद्धति के सूत्रधार व प्रणेता बने। उन्होंने आदि गंगा गोमती प्रक्षेत्र नन्दनवन, बख्शी का तालाब लखनऊ में दो दशक पूर्व 51 शक्तिपीठ तीर्थ की स्थापना की थी। आज यह तीर्थ अपने आध्यात्मिक वैभव की पताका फहरा रहा है। तीर्थ की परिकल्पना, संकल्पना और भव्य निर्माण की पावन यात्रा में उन्होंने जिस धैर्य, साहस और दृढ़ इच्छा-शक्ति का परिचय दिया है। उन्होंने अपने संकल्प को साकार करने का जो युग-स्मरणीय कार्य किया है। वह उन्हें युगऋषि की ऊँचाइयों तक ले जाता है। उन्हें शाक्त परम्परा का युगऋषि कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। इस तीर्थ की विशेषता यह है कि इसके स्थापत्य में आस्था के साथ-साथ विज्ञान और तर्क का सम्यक समावेश है। विग्रह स्थापन से लेकर सम्पूर्ण वास्तु शास्त्रोचित होने के साथ-साथ विज्ञान सम्मत भी है। सबसे बड़ी बात है यह कि 51 शक्तिपीठों का ऐसा समन्वित तीर्थ पूरी दुनिया में इसके अतिरिक्त कहीं और नहीं है। अतुलनीय माहात्म्य और दिव्यतापूर्ण वैशिष्ट्य की भाव-भूमि से सुविख्यात अगाध जन-आस्था का अप्रतिम पावन स्थल 51 शक्तिपीठ तीर्थ गर्भ गृह में मूल शक्ति त्रिकोण के साथ सर्व सिद्धेश्वरी तपस्विनी माँ पार्वती विद्यमान हैं। दाहिने ओर रक्षारोही भैरव और बायीं ओर ध्वजारोही हनुमान स्थापित हैं। गर्भ गृह के विग्रह स्थल के दाहिनी ओर 51 शक्तिपीठों से लाई गई रज के दर्शन होते हैं। मंदिर के प्रथम, द्वितीय और तृतीय तल पर क्रमशः 20, 20 और 11 शक्तिपीठों के दर्शन होते हैं। चतुर्थ तल पर दस महाविद्या स्थापित हैं। शीर्ष पंचम तल पर स्फटिक के दिव्य शिवलिंग और उनके सम्मुख विशालकाय नन्दी विद्यमान हैं।
