डेस्क:रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान रक्षा खरीद परिषद ने कई बड़े फैसले लेकर यह संदेश दे दिया है कि देश अपनी वायु और समुद्री ताकत को तेज रफ्तार से बढ़ाने जा रहा है। एक ओर लड़ाकू विमानों की नई खेप को मंजूरी मिली है, तो दूसरी ओर नौसेना के लिए लंबी दूरी तक नजर और वार करने वाले P-8I समुद्री गश्ती विमानों की राह खुली है। हम आपको बता दें कि P-8I विमान खेल युद्ध के मैदान में बदल देने में माहिर हैं। यह विमान लंबी दूरी की समुद्री टोह, पनडुब्बी रोधी युद्ध और समुद्री प्रहार में माहिर माने जाते हैं। समुद्र की सतह के ऊपर ही नहीं, उसके नीचे छिपे खतरे पर भी इनकी पैनी नजर रहती है। दुश्मन पनडुब्बी की हलचल पकड़ना, जहाजों की गतिविधि पर नजर रखना, संकट के समय त्वरित प्रहार करना, ये सब इसकी क्षमता का हिस्सा है। भारतीय नौसेना पहले से ऐसे 12 विमान चला रही है, जिन्होंने हजारों घंटे बिना किसी बड़े हादसे के उड़ान भर कर अपनी उपयोगिता साबित की है। एक दशक से अधिक सेवा के बाद भी इनका प्रदर्शन भरोसेमंद रहा है। देखा जाये तो हिंद महासागर आज दुनिया की बड़ी शक्तियों की खींचतान का केंद्र बन चुका है। इस मार्ग से भारी मात्रा में व्यापार गुजरता है, ऊर्जा आपूर्ति चलती है और सामरिक जहाजों की आवाजाही रहती है। रोजाना हजारों व्यापारी पोत और अनेक युद्धपोत इस क्षेत्र से गुजरते हैं। ऐसे में समुद्री क्षेत्र की पूरी जानकारी, यानी कहां कौन चल रहा है, किसकी क्या मंशा है, यह जानना ही असली ताकत है। P-8I और आने वाले मानवरहित निगरानी विमान मिलकर भारत की समुद्री समझ को नई ऊंचाई देने वाले हैं। इससे किसी भी संदिग्ध हलचल पर समय रहते प्रतिक्रिया संभव होगी।
