अंतरराष्ट्रीय

ईरान पर हमले की तैयारी! पेंटागन मध्य-पूर्व में दूसरा विमानवाहक युद्धपोत भेजेगा

डेस्कः एक अमेरिकी अखबार ने बुधवार को तीन अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि पेंटागन ने एक और विमानवाहक युद्धपोत स्ट्राइक ग्रुप को मध्य-पूर्व में तैनाती के लिए तैयार रहने का आदेश दिया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अमेरिका ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है और क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है।

यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से लंबी बैठक की। दोनों नेताओं के बीच बातचीत ऐसे समय हुई जब ईरान को लेकर अमेरिका और इजरायल की चिंता बढ़ी हुई है और वॉशिंगटन–तेहरान के बीच परमाणु समझौते पर बातचीत चल रही है।

ट्रंप ने क्या कहा?

मंगलवार को ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान के साथ बातचीत असफल होती है, तो वह मध्य-पूर्व में दूसरा विमानवाहक युद्धपोत भेजने पर विचार कर रहे हैं ताकि जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई की जा सके। अखबार ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा कि यदि अंतिम आदेश मिलता है, तो युद्धपोत को रवाना करने का फैसला कुछ ही घंटों में लिया जा सकता है। हालांकि अधिकारियों ने यह भी साफ किया कि अभी तक ट्रंप ने औपचारिक रूप से तैनाती का आदेश नहीं दिया है और हालात बदलने पर योजना में बदलाव भी हो सकता है।

कौन सा युद्धपोत जाएगा?

अगर दूसरा युद्धपोत भेजा गया, तो वह पहले से मौजूद यूएसएस अब्राहम लिंकन (USS Abraham Lincoln) के साथ शामिल होगा, जो पहले से ही मध्य-पूर्व में तैनात है। एक अधिकारी ने बताया कि पेंटागन अगले दो हफ्तों के भीतर एक और विमानवाहक युद्धपोत भेजने की तैयारी कर रहा है, जो संभवतः अमेरिका के पूर्वी तट से रवाना होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, यूएसएस जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश (USS George H.W. Bush) इस समय वर्जीनिया के तट के पास सैन्य अभ्यास कर रहा है और जरूरत पड़ने पर अपने अभ्यास को जल्दी खत्म कर सकता है।

ट्रंप–नेतन्याहू की लगभग 3 घंटे लंबी बैठक

व्हाइट हाउस में ट्रंप और नेतन्याहू की मुलाकात करीब तीन घंटे चली। बैठक के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने ईरान के साथ बातचीत जारी रखने पर जोर दिया। उन्होंने लिखा: “बैठक बहुत अच्छी रही, लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ। मैंने साफ कहा कि ईरान से बातचीत जारी रहनी चाहिए ताकि देखा जा सके कि समझौता संभव है या नहीं। अगर समझौता हो सकता है तो मैं इसके पक्ष में हूं, लेकिन अगर नहीं हुआ तो परिणाम अलग होंगे।”

ट्रंप ने यह भी चेतावनी दी, “पिछली बार जब ईरान ने समझौता नहीं किया था, तो उसे ‘मिडनाइट हैमर’ का सामना करना पड़ा था और यह उसके लिए अच्छा साबित नहीं हुआ। उम्मीद है कि इस बार ईरान ज्यादा समझदारी दिखाएगा।”

नेतन्याहू ने क्या चिंता जताई?

बैठक में नेतन्याहू ने ट्रंप को इजरायल की सुरक्षा से जुड़ी “रेड लाइन्स” समझाईं। उन्होंने खास तौर पर तीन मुद्दों पर जोर दिया —

ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम
मध्य-पूर्व में ईरान समर्थित मिलिशिया (प्रॉक्सी ग्रुप्स) की गतिविधियां
ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाएं
नेतन्याहू ने कहा कि ईरान को इजरायल या यूरोप पर हमला करने के लिए अंतरमहाद्वीपीय मिसाइलों (ICBM) की जरूरत नहीं है, क्योंकि उसके पास पहले से ही क्षेत्रीय मिसाइल क्षमता मौजूद है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईरान अभी भी आम नागरिकों और प्रदर्शनकारियों को मौत की सजा दे रहा है, जबकि उसने अमेरिका से ऐसा न करने का वादा किया था।

अगर बातचीत टूट गई तो क्या होगा?

दोनों नेताओं ने इस पर भी चर्चा की कि अगर ईरान से बातचीत पूरी तरह टूट जाती है तो क्या होगा। इसमें — संभावित सैन्य कार्रवाई, क्षेत्रीय युद्ध का खतरा, इजरायल पर संभावित ईरानी हमला और अमेरिकी–इजरायली संयुक्त रणनीति पर विचार किया गया।

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