
दरभंगा को सोलर सिटी बनाने की हो रही ठोस पहल : डॉ गोपाल जी ठाकुर
दरभंगा। दरभंगा शहर को भारत सरकार के महत्वकांक्षी हरित योजना सिटी एक्सेलेरेटर कार्यक्रम में शामिल कर बिहार में मॉडल सोलर सिटी बनाने की दिशा में शीघ्र पहल करने की आवश्यकता है ताकि आत्म निर्भर भारत, हरित भारत का लक्ष्य पूरा हो सके। दरभंगा शहर को सोलर सिटी बनाने तथा दरभंगा संसदीय क्षेत्र में उच्च क्षमता के नए सोलर पार्क की स्थापना के लिए केंद्रीय मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी से भेंट कर इस संबंध में पत्र सौंपकर आग्रह किया गया। स्थानीय सांसद सह लोकसभा में भाजपा सचेतक डा गोपाल जी ठाकुर ने बुधवार को भारत के केंद्रीय नवीन एवं नवीकरण ऊर्जा मंत्री, प्रह्लाद जोशी से मुलाक़ात कर इस संबंध में पत्र सौंपकर और इससे संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के बाद उपरोक्त बातें कही है। मौके पर सांसद डा ठाकुर ने केंद्रीय मंत्री, जोशी का पाग एवं अंगवस्त्र से सम्मानित भी किया। केंद्रीय मंत्री, जोशी से हुई मुलाकात एवं चर्चा की जानकारी देते हुए बताया उन्होंने केंद्रीय मंत्री से सौंपे गए आग्रह पत्र में वर्णित विषयों पर चर्चा करते हुए कहा है कि दरभंगा शहर शैक्षणिक, प्रशासनिक,स्वास्थ्य एवं व्यापारिक गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र बन रहा है। जहां ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, संस्कृत विश्वविद्यालय, डीएमसीएच,निर्माणाधीन एम्स, एयरपोर्ट, रेलवे जक्शन, नगर निगम क्षेत्र, तीव्र गति से बढ़ते आवासीय एवं वाणिज्यिक भवनों की मौजूदगी के कारण रूफटॉफ सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएं है लेकिन संगठित तकनीकी मार्गदर्शन तथा समर्पित नीति समर्थन के अभाव में इस क्षमता का उपयोग नहीं किया जा रहा है। सांसद ने केंद्रीय मंत्री के समक्ष चर्चा के क्रम में इस मुद्दे की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा यदि दरभंगा शहर को सिटी एक्सरेलेटर कार्यक्रम के तहत शामिल किया जाता है तो शहरी भवनों पर रूफटॉफ सौर ऊर्जा को गति मिलेगी तथा नगर निगम, विद्युत वितरण कंपनी एवं राज्य नोडल एजेंसी के बीच बेहतर समन्वय बनाकर विद्युत पर शहर की आत्मनिर्भरता कम होगी। केंद्रीय मंत्री से दरभंगा संसदीय क्षेत्र में 5 सौ मेगावाट या इससे अधिक की उच्च क्षमता के नए सोलर अल्ट्रा मेगा सोलरपार्क की स्थापना की मांग करते हुए कहा इस दिशा में ठोस कदम उठाने तथा दरभंगा को बिहार के मॉडल सोलर सिटी बनाने की दिशा में शीघ्र पहल करने की आवश्यकता है ताकि मिथिला क्षेत्र में पर्यावरण अनुकूल विकास को नई गति मिल सके और बिजली की आत्मनिर्भरता कम हो सके।