
लोकसभा में दरभंगा के सांसद गोपाल जी ठाकुर ने मिथिला क्षेत्र में माध्यमिक कक्षा तक मैथिली को अनिवार्य करने की रखी मांग
दरभंगा। मिथिला क्षेत्र तथा मैथिली भाषा को केंद्र की एनडीए सरकार में ऐतिहासिक सम्मान मिला है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी बाजपेई ने मैथिली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया तथा वर्तमान पीएम मोदी जी के नेतृत्व में इस भाषा को सीबीएसई पाठ्यक्रम में शामिल किया गया। इस भाषा में संविधान की प्रतियों का विमोचन कर इसे न्यायिक तथा विधायी कार्यों में सन्निहित किया गया जो साढ़े आठ करोड़ मिथिलावासियों के लिए गर्व का विषय है। अब इस भाषा को मिथिला क्षेत्र अंतर्गत प्राथमिक, माध्यमिक कक्षाओं में अनिवार्य रूप से शामिल किए जाने की आवश्यकता है जिसके लिए केंद्र सरकार के द्वारा शीघ्र पहल शुरू की जाएगी। भाजपा के सांसद सह लोकसभा में पार्टी के सचेतक डा गोपाल जी ठाकुर ने लोकसभा में प्रश्नकाल में प्रश्न संख्या 1579 के आलोक में सरकार से इस दिशा में शीघ्र पहल शुरू करने की मांग करते हुए कहा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत कम से कम दस हजार की आबादी के द्वारा बोली जाने वाली स्थानीय क्षेत्रीय भाषा को मातृ भाषा के रूप में अनिवार्य रूप शामिल करने का प्रावधान है, मैथिली भाषा सरकार की नई शिक्षा नीति 2020 के हर मानदंडों को पूरा करती है।
सांसद डा ठाकुर ने लोकसभा के प्रश्नकाल में मैथिली भाषा को प्राथमिक तथा माध्यमिक कक्षाओं में अनिवार्य रूप से शामिल किए जाने को हर दृष्टि से उपयुक्त बताते हुए कहा एनईपी 2020 मे केंद्र सरकार का स्पष्ट निर्देश है कम से कम 5 वीं, यदि संभव हो तो 8 वीं कक्षा तक शिक्षा का माध्यम मातृ भाषा होना अनिवार्य है, जिससे स्थानीय भाषा का संरक्षण और संवर्धन हो सके।
केंद्र की नई शिक्षा के प्रावधानों की सराहना करते हुए कहा 1 से 6 कक्षाओं तक के लिए देश स्तर पर 22 अधिसूचित भाषाओं में पाठ्यक्रम के लिए पाठ्य पुस्तके प्रकाशित तथा विकसित किए जाने का निर्णय लिया गया था तथा सीबीएसई ने बुनियादी स्तर, प्रारंभिक स्तर पर शिक्षा के माध्यम के रूप में घरेलू भाषा को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया था। जिसके आलोक में मैथिली भाषा को आठवीं कक्षा तक अनिवार्य किया जाना आवश्यक है। उन्होंने मैथिली भाषा को देश ही नही वैश्विक स्तर पर एक समृद्ध भाषा के रूप में रेखांकित करते हुए कहा देश के बहुसंख्यक भाग खासकर उत्तर भारत के क्षेत्रों में मैथिली भाषी लोगों की काफी संख्या है तथा झारखंड में यह द्वितीय राजभाषा के रूप में स्थापित है इस लिए मिथिला क्षेत्र में इस भाषा की प्रारंभिक तथा माध्यमिक कक्षाओं के लिए अनिवार्य भाषा के रूप में शामिल किए जाने की पहल शुरू किया जाय। उन्होंने मैथिली भाषा की ऐतिहासिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा इस भाषा की अपनी स्वतंत्र लिपि और पहचान है तथा देश के सभी प्रमुख विश्वविद्यालयो में इस भाषा में उच्चतर कक्षाओं में अध्ययन किया जाता है इसलिए मिथिला क्षेत्र में इसे अनिवार्य भाषा के रूप में शामिल करना लाजिमी है।