पुणे: महाराष्ट्र जिला परिषद चुनाव 2026 के नतीजों ने पुणे जिले की सियासत में एक बार फिर एनसीपी की मजबूत पकड़ को साबित कर दिया है। अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने जिले की 73 में से 72 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से पार्टी ने 51 सीटों पर जीत दर्ज की। इस शानदार प्रदर्शन के साथ एनसीपी ने पुणे जिला परिषद पर अपना वर्चस्व कायम रखा है।
सोमवार को नतीजे सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में अजित पवार का वह पुराना बयान फिर चर्चा में आ गया “देखो जिला किसके पीछे खड़ा है।” दरअसल, इससे पहले पंचायत समिति चुनावों में भी एनसीपी को बड़ी सफलता मिली थी। तब नतीजों के दिन बारामती में मैराथन बैठकों के बीच अजित पवार ने अपने खास अंदाज में यही प्रतिक्रिया दी थी।
जिला परिषद के नतीजों में एनसीपी ने कई तालुकों में बढ़त दिखाई। जुन्नार, अंबेगांव, शिरुर, खेड़ और हवेली जैसे इलाकों में पार्टी ने अहम सीटें जीतीं, जबकि मावल, बारामती और इंदापुर में तो एनसीपी का प्रदर्शन पूरी तरह एकतरफा रहा। खासतौर पर बारामती में 6 में से 6 और इंदापुर में 8 में से 8 सीटों पर जीत ने पार्टी की ताकत को रेखांकित किया।
चुनावी माहौल उस वक्त भावनात्मक हो गया था, जब प्रचार के दौरान हुए विमान हादसे में अजित पवार के निधन की खबर आई। इसके बाद एनसीपी ने बड़े मंचों और रैलियों से दूरी बनाए रखी और घर-घर संपर्क व पर्चा वितरण के जरिए शांत प्रचार किया। इसके बावजूद मतदाताओं ने पार्टी को जबरदस्त समर्थन दिया।
इन नतीजों के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच यही चर्चा है कि पुणे की जनता ने एक बार फिर एनसीपी के पक्ष में अपना भरोसा जताया है और अजित पवार का वह आत्मविश्वासी बयान आज भी सियासी हकीकत में गूंजता नजर आ रहा है।
आशुतोष झा
