डेस्क: दुनिया की सैन्य ताकत को लेकर जारी होने वाली Global Firepower Military Strength Ranking 2026 में पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है. इस साल की रैंकिंग में पाकिस्तान 14वें स्थान पर पहुंच गया है, जबकि पिछले चार वर्षों से उसकी स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है.
आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान साल 2023 में 7वें, 2024 में 9वें, 2025 में 12वें और अब 2026 में 14वें पायदान पर खिसक गया है. इसके उलट अमेरिका, रूस, चीन और भारत बीते चार वर्षों से शीर्ष चार स्थानों पर अपनी जगह बनाए हुए हैं.
Global Firepower ने साल 2026 की रैंकिंग में कुल 145 देशों की सैन्य क्षमता का मूल्यांकन किया है.
किन आधारों पर तय होती है रैंकिंग?
ग्लोबल फायरपॉवर की यह रैंकिंग केवल सैनिकों की संख्या तक सीमित नहीं होती. इसमें करीब 60 से अधिक पैमानों के आधार पर देशों की सैन्य ताकत का आकलन किया जाता है. इनमें शामिल हैं:
सेना, वायुसेना और नौसेना की क्षमता
हथियारों की गुणवत्ता और संख्या
रक्षा बजट और सैन्य खर्च
तकनीकी और आधुनिक युद्ध क्षमताएं
लॉजिस्टिक सपोर्ट और सप्लाई चेन
आर्थिक स्थिरता और औद्योगिक आधार
इन्हीं सभी मानकों पर पाकिस्तान का प्रदर्शन लगातार कमजोर पड़ता नजर आ रहा है.
1. कमजोर अर्थव्यवस्था बनी सबसे बड़ी बाधा
पाकिस्तान की गिरती सैन्य रैंकिंग की सबसे अहम वजह उसकी डगमगाती अर्थव्यवस्था मानी जा रही है. देश लंबे समय से गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है. भारी विदेशी कर्ज, बढ़ती महंगाई और घटते विदेशी मुद्रा भंडार ने सरकार की वित्तीय क्षमता को सीमित कर दिया है.
इसका सीधा असर रक्षा बजट पर पड़ा है. पाकिस्तान न तो अपने सैन्य खर्च में बड़ा इजाफा कर पा रहा है और न ही अत्याधुनिक हथियारों और तकनीक में बड़े पैमाने पर निवेश कर पा रहा है.
2. सैन्य आधुनिकीकरण की धीमी रफ्तार
जहां अमेरिका, चीन, रूस और भारत जैसे देश ड्रोन टेक्नोलॉजी, मिसाइल डिफेंस सिस्टम, साइबर वॉरफेयर और स्पेस कैपेबिलिटी पर तेजी से निवेश कर रहे हैं, वहीं पाकिस्तान इस रेस में पीछे छूटता नजर आ रहा है.
सीमित संसाधनों के चलते पाकिस्तान का सैन्य फोकस अभी भी पारंपरिक ढांचे को बनाए रखने तक सीमित है. नई पीढ़ी की युद्ध तकनीकों में अपेक्षित प्रगति न होना उसकी रैंकिंग पर भारी पड़ा है.
3. एयरफोर्स और नेवी में संसाधनों की कमी
पाकिस्तान की वायुसेना और नौसेना भी संसाधनों की कमी से जूझ रही हैं. कई फाइटर जेट पुराने हो चुके हैं, एयर डिफेंस सिस्टम सीमित हैं और नौसेना में जहाजों की संख्या भी अपेक्षाकृत कम है.
इसके मुकाबले भारत ने स्वदेशी रक्षा उत्पादन, आधुनिक फाइटर जेट, एयरक्राफ्ट कैरियर, परमाणु पनडुब्बी और उन्नत मिसाइल प्रणालियों में बड़ी बढ़त हासिल की है, जिससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर भी असर पड़ा है.
4. अंदरूनी सुरक्षा चुनौतियों ने बढ़ाई मुश्किलें
पाकिस्तान की सैन्य क्षमता पर उसकी आंतरिक सुरक्षा समस्याओं का भी गहरा असर पड़ रहा है. बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे क्षेत्रों में जारी आतंकी गतिविधियों से निपटने में सेना का बड़ा हिस्सा लगातार तैनात रहता है.
इस वजह से पाकिस्तान की सेना का ध्यान बाहरी मोर्चों और रणनीतिक तैयारियों से बंट जाता है, जो उसकी समग्र सैन्य ताकत को कमजोर करता है.
टॉप-4 देशों की स्थिति बरकरार
Global Firepower की 2026 की रैंकिंग में अमेरिका, रूस, चीन और भारत लगातार चौथे साल शीर्ष चार स्थानों पर बने हुए हैं. इन देशों ने रक्षा बजट, तकनीकी निवेश और सैन्य आधुनिकीकरण में निरंतरता बनाए रखी है, जिसका असर उनकी वैश्विक रैंकिंग में साफ दिखाई देता है.
