मुंबई: मुंबई में प्रस्तावित बिहार भवन का मुद्दा अब महाराष्ट्र और बिहार की राजनीति के बीच टकराव का कारण बन गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता यशवंत किल्लेदार की ओर से बिहार भवन के निर्माण को रोकने की धमकी के बाद बिहार सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। नीतीश सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह देश लोकतंत्र से चलता है, किसी की जागीर से नहीं।
अशोक चौधरी ने मनसे नेताओं के बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति या पार्टी यह तय नहीं कर सकती कि देश के किस हिस्से में क्या बनेगा और क्या नहीं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या महाराष्ट्र में किसी का व्यक्तिगत शासन है और क्या कुछ नेता खुद को वहां का राजा समझ बैठे हैं।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि मुंबई में बनने वाला बिहार भवन किसी राजनीतिक प्रदर्शन का नहीं, बल्कि जरूरत का प्रतीक है। यह भवन खास तौर पर उन लोगों के लिए बनाया जा रहा है जो इलाज के लिए बिहार से मुंबई आते हैं और जिन्हें रहने की भारी परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि देश के कई बड़े शहरों में अलग-अलग राज्यों के भवन पहले से मौजूद हैं और उसी परंपरा के तहत बिहार भवन का निर्माण भी पूरी तरह जायज़ है।
दरअसल, मनसे नेता यशवंत किल्लेदार ने कहा था कि उनकी पार्टी मुंबई में 314 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले बिहार भवन को किसी भी हाल में नहीं बनने देगी। इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नाराजगी देखने को मिल रही है। नीतीश सरकार के नेताओं का कहना है कि इस तरह की धमकियां न सिर्फ संविधान के खिलाफ हैं, बल्कि देश की एकता पर भी सवाल खड़ा करती हैं।
इस मुद्दे पर सियासत गरमाती जा रही है और आने वाले दिनों में महाराष्ट्र और बिहार के बीच यह बयानबाज़ी और तेज होने के आसार हैं।
आशुतोष झा
