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UGC के निर्देश सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ : डॉ. प्रभाकर झा

दरभंगा : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित जानकारी और निगरानी से जुड़े हालिया निर्देशों को लेकर मिथिलांचल सहित पूरे बिहार में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। ब्राह्मण काउंसिल के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रभाकर झा ने इस फैसले को सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।

दरभंगा में जारी अपने बयान में डॉ. प्रभाकर झा ने कहा कि आज के समय में कॉलेज और विश्वविद्यालयों की कक्षाओं में पढ़ने वाले 50 से 60 फीसदी छात्र एक-दूसरे की जाति तक नहीं जानते। अधिकतर छात्र पढ़ाई और शैक्षणिक फॉर्म में अपनी जाति का उल्लेख नहीं करते। ऐसे में UGC द्वारा जाति को आधार बनाकर निगरानी करना शिक्षा की समानता और निष्पक्षता की भावना के विपरीत है।

“शिक्षा को जाति में बांटने का प्रयास”

डॉ. झा ने आरोप लगाया कि UGC के नाम पर सामान्य वर्ग पर एकतरफा और अन्यायपूर्ण व्यवस्था थोपी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय शैक्षणिक संस्थानों में सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देगा और छात्रों के बीच आपसी सौहार्द को नुकसान पहुंचाएगा।

मिथिलांचल के छात्रों में रोष

डॉ. प्रभाकर झा ने कहा कि दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर और आसपास के जिलों के छात्र इस फैसले से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी अभियान के जरिए छात्र खुलकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।

राजनीतिक चुप्पी पर उठे सवाल

उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक दल और नेता खुद को सामान्य वर्ग का हितैषी बताते रहे हैं, वे इस मुद्दे पर पूरी तरह चुप हैं। “हर फैसले को मास्टरस्ट्रोक बताने वाला भाजपा का आईटी सेल भी इस मुद्दे पर खामोश नजर आ रहा है,” डॉ. झा ने कहा।

आंदोलन की चेतावनी

डॉ. प्रभाकर झा ने केंद्र सरकार और UGC से मांग की कि इस फैसले पर तुरंत पुनर्विचार किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह निर्देश वापस नहीं लिया गया, तो बिहार से शुरू होकर देशभर में छात्र और सामाजिक संगठन आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

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