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उत्तर प्रदेश की विभिन्न जेलों में 14 वर्ष या अधिक समय से निरुद्ध बंदियों का विवरण मांगा

डेस्क:इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने प्रदेश सरकार से उन बंदियों का विवरण मांगा है जो प्रदेश की विभिन्न जेलों में 14 वर्ष या इससे अधिक समय से बंद हैं। पीठ ने ऐसे बंदियों द्वारा कानून के मुताबिक सजा माफ करने के लिए किए गए आवेदनों का भी विवरण मांगा है। पीठ ने सरकार से ऐसे आवेदनों का आंकड़ा मांगा है जिन पर संबंधित अधिकारियों द्वारा 14 साल से जेल में बंद बंदियों की सजा माफी पर विचार किया जा रहा है। न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति एके चौधरी की पीठ ने 2020 में बीके सिंह परमार नाम के व्यक्ति द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को यह आदेश पारित किया और सुनवाई की अगली तिथि 23 फरवरी निर्धारित की।

याचिका में कहा गया है कि कानूनी प्रावधानों के मुताबिक, 14 वर्षों से जेल में निरुद्ध प्रत्येक बंदी के अच्छे आचरण के आधार पर उसकी सजा माफी पर समय से पहले उसकी रिहाई पर विचार किए जाने का उसका अधिकार है और जैसे ही बंदी जेल में 14 वर्ष पूरे कर लेता है, प्रत्येक बंदी के मामले पर विचार करना जेल अधिकारियों का कानूनी दायित्व है।

याचिकाकर्ता ने कहा कि जेल के अधिकारी अपने कानूनी दायित्व का निर्वहन नहीं कर रहे हैं। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा, “यह याचिका जेल अधिकारियों द्वारा कानूनी दायित्वों का निर्वहन नहीं करने का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाती है।”

राज्य सरकार द्वारा 2022 में दाखिल हलफनामे पर विचार करते हुए पीठ ने कहा कि इसमें उन बंदियों के आंकड़े नहीं हैं जिन्होंने जेल में 14 वर्ष पूरे किए हैं। पीठ ने अपर मुख्य सचिव (गृह) को इस मामले में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

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