डेस्क: भारतीय रुपया बुधवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 31 पैसे टूटकर अब तक के सबसे निचले स्तर 91.28 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। डॉलर की स्थिर मांग और वैश्विक स्तर पर सतर्कता भरे माहौल के चलते रुपये पर दबाव देखने को मिला।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को बढ़ाया है, जिसका असर उभरते बाजारों की मुद्राओं पर साफ दिखाई दे रहा है। इसके अलावा, विदेशी पूंजी की लगातार निकासी और घरेलू शेयर बाजार में सुस्ती ने भी रुपये की कमजोरी को बढ़ाया।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 91.05 प्रति डॉलर पर खुला और कुछ ही देर में 31 पैसे गिरकर 91.28 के स्तर पर आ गया। इससे पहले मंगलवार को रुपया सात पैसे की गिरावट के साथ 90.97 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था।
इस बीच, छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.05 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 98.59 पर रहा।
शेयर बाजार में भी गिरावट
घरेलू शेयर बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 385.82 अंक टूटकर 81,794.65 अंक पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 91.5 अंक फिसलकर 25,141 के स्तर पर आ गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.11 प्रतिशत गिरकर 64.20 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई।
एफआईआई की बिकवाली जारी
शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) मंगलवार को भी बिकवाल रहे। उन्होंने शुद्ध रूप से 2,938.33 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकेतों, डॉलर की चाल और विदेशी निवेशकों के रुख पर आगे भी रुपये और शेयर बाजार की दिशा निर्भर करेगी।
