
दरभंगा। मिथिला के विकास तथा यहां के ज्ञान परंपरा व संस्कृति को देश स्तर पर स्थापित करने में दरभंगा महाराज तथा उनके राज परिवार की अहम भूमिका रही है। आजादी की लड़ाई से लेकर आजादी के बाद भी इस राज परिवार ने जितने योगदान दिए उसे भुलाना संभव नहीं है। दरभंगा राज परिवार की आखिरी महारानी महाराजा कामेश्वर सिंह की धर्मपत्नी महारानी कामसुंदरी देवी का निधन न केवल मिथिला क्षेत्र के लिए बल्कि देश के लिए एक बड़ी क्षति है जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती है। स्थानीय सांसद सह लोकसभा में भाजपा सचेतक डा गोपाल जी ठाकुर ने आज दरभंगा स्थित दरभंगा महाराज के आवास पर पहुंचकर युवराज कपिलेश्वर सिंह सहित अन्य परिजनों के बीच अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए उपरोक्त बातें कही। उन्होंने कहा दिवंगत महारानी कामसुंदरी देवी के परिजनों के बीच शोक प्रकट करते हुए कहा इनके निधन से मिथिला क्षेत्र के एक युग का अंत हो गया तथा अब मिथिला के गौरवशाली इतिहास तथा परंपरा का सूर्य पूर्ण रूप अस्त हो गया। महारानी को धार्मिक आस्था का प्रतीक हुए सांसद डा ठाकुर ने कहा महारानी न केवल राजसी परंपराओं की संरक्षक थीं, बल्कि मिथिला की संस्कृति और विदुषता की प्रतिमूर्ति भी थी इसलिए उनके स्मृतियों को जीवंत रखना ही उनकी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। शोक संवेदना के क्रम में युवराज कपिलेश्वर सिंह से दरभंगा सहित मिथिला तथा देश स्तर पर दरभंगा महाराज के द्वारा दिए गए योगदानों के बारे में नई पीढ़ी के साथ साझा करने पर जोर देते हुए कहा कि दरभंगा राजपरिवार के सम्मान की वापसी तथा महाराज के योगदानों को नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह तथा सरकार और संगठन के शीर्ष नेतृत्व को अवगत कराएंगे। मौके पर युवराज कपिलेश्वर सिंह पूर्व प्रमुख रंगनाथ ठाकुर दरभंगा नगर निगम में सांसद प्रतिनिधि ठाकुर भूपेंद्र किशोर, वार्ड पार्षद विकास चौधरी पार्टी नेता विनोद सहनी सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।