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ट्रंप की नजर अब क्यूबा पर क्यों? अमेरिका से क्या है विवाद, इतिहास में छुपे हैं सारे जवाब

डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन के संकेतों के बाद अब अपना ध्यान क्यूबा की ओर केंद्रित कर लिया है. ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ के माध्यम से क्यूबा की सरकार को एक कड़ा अल्टीमेटम दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि क्यूबा को अब अमेरिका के साथ समझौता करना होगा या उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.

ट्रंप ने आरोप लगाया कि क्यूबा लंबे समय से वेनेजुएला से मिलने वाले तेल और धन पर निर्भर रहा है, जिसके बदले में उसने वहां के तानाशाहों को सुरक्षा सेवाएं प्रदान कीं. ट्रंप का दावा है कि हाल ही में वेनेजुएला में हुई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान वहां मौजूद ज्यादातर क्यूबाई सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं.

क्यूबा को नहीं मिलेगी कोई भी मदद

उन्होंने घोषणा की है कि अब वेनेजुएला से क्यूबा को किसी भी तरह की मदद नहीं भेजी जाएगी. ट्रंप का संदेश स्पष्ट है, “वेनेजुएला के पास अब दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना (अमेरिका) है और क्यूबा को बहुत देर होने से पहले समझौता कर लेना चाहिए.”

दुश्मनी की ऐतिहासिक जड़ें

अमेरिका और क्यूबा के बीच तनाव की कहानी एक सदी से भी अधिक पुरानी है. 1898 में स्पेन की हार के बाद क्यूबा अमेरिकी संरक्षण में आया. हालांकि 1902 में इसे स्वतंत्रता मिली, लेकिन प्लैट संशोधन के कारण अमेरिका को क्यूबा के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का अधिकार बना रहा.

जेएनयू के प्रोफेसर राजन कुमार के अनुसार, अमेरिका हमेशा से वेस्टर्न हेमिस्फीयर में किसी बाहरी शक्ति, विशेषकर रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकना चाहता है. क्यूबा के रूस और चीन के साथ घनिष्ठ संबंध अमेरिका की इस रणनीति में सबसे बड़ी बाधा रहे हैं.

शीत युद्ध और प्रतिबंधों का दौर

दुश्मनी की सबसे गहरी नींव 1959 में पड़ी, जब फिदेल कास्त्रो ने अमेरिका समर्थित बतिस्ता शासन को उखाड़ फेंका. जब कास्त्रो ने सोवियत संघ की ओर हाथ बढ़ाया और अमेरिकी संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण किया, तो अमेरिका ने सख्त रुख अपना लिया. राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी ने क्यूबा पर पूर्ण आर्थिक और यात्रा प्रतिबंध लगा दिए.

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