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दरभंगा और बिहार की अंतिम महारानी कामसुन्दरी देवी हमेशा याद रहेगी, कुमार कपिलेश्वर सिंह पहुंचे दरभंगा सीधे पहुंचे अंतिम संस्कार स्थल किया नम आँखों से नमन

दरभंगा। दरभंगा की अंतिम महारानी कामसुन्दरी देवी का 93 वर्ष की उम्र में सोमवार को हुई निधन और अंतिम संस्कार श्यामा मंदिर परिसर में किया गया था। दरभंगा ही नहीं पूरा मिथिलांचन गमगीन है और उनके अंतिम दर्शन के लिए पूरा दरभंगा उमर परी थी। दरभंगा राज परिवार की अंतिम महारानी, स्वर्गीय महाराजाधिराज डॉ सर कामेश्वर सिंह की धर्मपत्नी, महारानी कामसुन्दरी देवी की खबर सुनते ही कुमार कपिलेश्वर सिंह मंगलवार को दरभंगा पहुंचते ही अंतिम संस्कार स्थल पहुंचकर सबसे पहले अपनी दादी को नमन किया। अपने कार्यों और समाज के लिए समर्पित होकर किए कार्यो के लिए महारानी हमेशा दरभंगा ही नहीं पूरे देश में सदा याद रखी जाएगी। वे सादगी और अपनापन के लिए जानी जाती रही है उन्होंने हर मिलने वालों से हमेशा प्रेम और चेहरे पर हल्की मुस्कान के साथ मिला करती है। समाज के उत्थान के लिए हमेशा खड़ी रहने वाली रही है, हमेशा मानवता के साथ महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंह के बाद इन्होने भी हमेशा उसी तरह कार्य करती रही है। इसी उदेश्य से उन्होंने कल्याणी फाउंडेशन ट्रस्ट की स्थापना किया था। सोमवार 12 जनवरी 2026 की सुबह तीन बजे स्वर्गवास हो गया। महारानी साहिबा का जन्म 22.10. 1932 में मंगरौनी में हुआ था और 93 वर्ष की आयु में उनका आकस्मिक निधन हो गया। ऐसा प्रतीत होता है, मानो जैसे सम्पूर्ण मिथिला आज मौन, किंतु सशक्त चेतना आज हमारे बीच से विदा हो गई। उनके देहावसान से न केवल दरभंगा, बल्कि संपूर्ण मिथिलांचल और देश के सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक जीवन में एक खालीपन आ गया है, जिसकी पूर्ति अब कभी भी संभव नहीं हो सकता है। महारानी कामसुन्दरी देवी सादगी, सौम्यता, करुणा और गरिमा की जीवंत प्रतिमूर्ति बताई जाती है। उन्होंने जीवन भर राजपरंपरा की मयार्दाओं का निर्वाह करते हुए स्वयं को सदैव लोगो की भलाई से जोड़े रखा। वैभव और ऐश्वर्य के बिच रहते हुए भी उनका व्यक्तित्व अत्यंत सरल, संयमी और संवेदनशील रहा है। उनका संपूर्ण जीवन मौन साधना, त्याग, अनुशासन और मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठा के लिए हमेशा समर्पित रहा है। जिसने समाज को दिशा और मयार्दा दोनों प्रदान की। इस दुःख की घड़ी में सम्पूर्ण दरभंगावासी दरभंगा राज परिवार के साथ खड़ी है। मिथिला की धरती ने सोमवार को अपनी एक ऐसी विभूति को दरभंगा ने खो दिया है, जिनकी उपस्थिति से ही परंपरा, संस्कार और संवेदना का बोध होता था। यह केवल एक व्यक्तित्व का अंत नहीं, बल्कि एक युग की बात है, एक सादगी,एक समाज के लिए समर्पित रहने वाली महारानी जुदा हो गई है। इस अत्यंत शोकाकुल अवसर पर दिवंगत महारानी के चरणों में कोटि-कोटि नमन अर्पित करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि दी जाती है। फाउंडेशन परिवार इस अपार दुःख की घड़ी में शोकसंतप्त राजपरिवार, परिजनों और कुमार कपिलेश्वर सिंह के साथ मिथिलावासी गहरी संवेदना और आत्मिक एकजुटता प्रकट करता है। भावपूर्ण श्रद्धांजलि। महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन दरभंगा,

बिहार उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत बना रहेगा।

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