दरभंगा : कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करते हुए दो स्वयंसेवकों—काजल कुमारी एवं मनोज मिश्र—ने 31 दिसंबर से 6 जनवरी तक पटना स्थित ईगल व्यू ट्रेनिंग सेंटर में भारत सरकार द्वारा आयोजित आपदा मित्र प्रशिक्षण कार्यक्रम में सक्रिय एवं सराहनीय सहभागिता निभाई।
यह प्रशिक्षण आपदा से पूर्व, दौरान एवं बाद में किए जाने वाले जीवनरक्षक उपायों पर केंद्रित था। इसमें एसडीआरएफ टीम द्वारा बाढ़, आग, भूकंप, वज्रपात, सड़क दुर्घटना तथा प्राथमिक उपचार (सीपीआर) का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। विशेष रूप से बिहार में हर वर्ष आने वाली बाढ़ से बचाव हेतु घरेलू सामग्रियों, जैसे प्लास्टिक बोतलों से बने कृत्रिम फ्लोटिंग उपकरणों की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण के दौरान सड़क सुरक्षा के अंतर्गत हेलमेट एवं सीट बेल्ट के अनिवार्य प्रयोग, नियंत्रित गति से वाहन चलाने तथा अग्नि सुरक्षा में गैस रिसाव और विद्युत दुर्घटनाओं से बचाव के उपाय बताए गए। भूकंप के समय सुरक्षित स्थानों पर रहने, भवनों की संरचनात्मक मजबूती तथा वज्रपात के दौरान कुकुर मुद्रा अपनाने पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम का सबसे प्रभावी पक्ष सीपीआर प्रशिक्षण रहा, जिसमें हृदयगति रुकने की स्थिति में 4–5 मिनट के भीतर जीवनरक्षा की तकनीक सिखाई गई तथा सभी स्वयंसेवकों से इसका अभ्यास भी कराया गया।
विश्वविद्यालय के पी आर ओ डा. निशिकान्त सिंह ने सूचना दी कि आपदा मित्र प्रशिक्षण से सकुशल लौटने के उपरांत विश्वविद्यालय स्तर पर दोनों स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन करते हुए शिक्षकों एवं कार्यक्रम पदाधिकारियों द्वारा उन्हें शुभकामनाएँ दी गईं।
इस अवसर पर शिक्षाशास्त्र के निदेशक डॉ. घनश्याम मिश्र ने कहा- “आपदा मित्र प्रशिक्षण एनएसएस स्वयंसेवकों को समाज का वास्तविक प्रहरी बनाता है। काजल एवं मनोज ने विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है।”
डॉ. रामसेवक झा, शिक्षाशास्त्र विभाग के शिक्षक एवं महारानी अधिरानी रमेश्वरलता संस्कृत महाविद्यालय के सहायक आचार्य, ने स्वयंसेवकों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि काजल और मनोज जैसी छात्रों का आपदा मित्र के रूप में आगे आना यह दर्शाता है कि हमारे छात्र केवल अध्ययन तक सीमित नहीं, बल्कि समाज सेवा में भी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।” राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. सुधीर कुमार ने कहा—“यह अत्यंत गर्व का विषय है कि एनएसएस के स्वयंसेवक आपदा मित्र प्रशिक्षण के माध्यम से ‘नॉट मी बट यू’ के आदर्श को व्यवहार में उतार रहे हैं। यह प्रशिक्षण उनके जीवन का स्थायी संस्कार बनेगा।”
पचहाढी कॉलेज के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. त्रिलोक झा ने मनोज मिश्र को बधाई देते हुए कहा कि इस प्रकार का प्रशिक्षण युवाओं को आपात स्थितियों में नेतृत्व प्रदान करने में सक्षम बनाता है। रमेश्वर लता संस्कृत महाविद्यालय के कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. मुकेश प्रसाद निराला ने काजल कुमारी के उत्साह और सक्रियता की प्रशंसा करते हुए उन्हें अन्य छात्राओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
कार्यक्रम का सफल संयोजन स्नातकोत्तर इकाई की कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. साधना शर्मा द्वारा किया गया। वह सभी स्वयंसेवकों को प्रक्रिया संबंधी लिंक साझा कर समय पर फॉर्म भरने एवं प्रशिक्षण पूर्ण करने हेतु निरंतर मार्गदर्शन दे रहीं थीं। तकनीकी सहयोग श्री राकेश कुमार द्वारा प्रदान किया गया।
अपने अनुभव साझा करते हुए काजल कुमारी ने कहा—
“सीपीआर प्रशिक्षण ने मुझे यह आत्मविश्वास दिया कि आपात स्थिति में मैं किसी की जान बचा सकती हूँ।”
वहीं मनोज मिश्र ने कहा— आपदा मित्र बनना मेरे लिए केवल प्रशिक्षण नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक दायित्व है।”
यह प्रशिक्षण स्वयंसेवकों को न केवल आपदा से निपटने में सक्षम बनाता है, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाकर जीवनरक्षा की संस्कृति को भी मजबूत करता है।
