डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया को अपने उस बयान से चौंका दिया है, जिसे कुछ साल पहले तक एक रियल एस्टेट डील का मजाक समझा जाता था. ट्रंप ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करना अब केवल एक इच्छा नहीं, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा की अनिवार्य आवश्यकता है.
हाल ही में वेनेजुएला में हुए एक बेहद साहसिक और विवादास्पद सैन्य ऑपरेशन के बाद, जिसमें अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया, ट्रंप की ग्रीनलैंड संबंधी टिप्पणियों को अब वैश्विक समुदाय गंभीरता से ले रहा है.
वेनेजुएला से ग्रीनलैंड तक शक्ति प्रदर्शन
3 जनवरी 2026 को अमेरिकी विशेष सैन्य बलों ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस में छापेमारी कर मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में लिया और उन्हें सीधे न्यूयॉर्क ले आए. इस घटना ने साबित कर दिया कि ट्रंप प्रशासन अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और संप्रभुता के पुराने नियमों को बदलने की तैयारी में है.
व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने स्पष्ट कर दिया है कि ग्रीनलैंड हासिल करने के लिए सैन्य कार्रवाई भी एक विकल्प है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानूनों को कागजी नियम बताते हुए कहा कि शक्ति पर आधारित इस दुनिया में अमेरिका के हितों के आगे कोई नहीं टिकेगा. ट्रंप ने लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री को ग्रीनलैंड के लिए विशेष दूत नियुक्त कर अपने इरादे साफ कर दिए हैं.
अमेरिका के लिए ग्रीनलैंड का ‘रणनीतिक गणित’
ग्रीनलैंड, जो भौगोलिक रूप से उत्तरी अमेरिका का हिस्सा है लेकिन राजनीतिक रूप से डेनमार्क का एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है, अमेरिका के लिए पांच कारणों से महत्वपूर्ण है.
मिसाइल डिफेंस और सर्विलांस
आर्कटिक क्षेत्र में स्थित ग्रीनलैंड अमेरिका, रूस और यूरोप के बीच एक बफर जोन का काम करता है. यहां पहले से मौजूद थुले एयर बेस अमेरिका की मिसाइल चेतावनी प्रणाली का केंद्र है. पूर्ण नियंत्रण मिलने से अमेरिका यहां अपनी सैन्य निगरानी को अभेद्य बना सकेगा.
