कंपनियां अक्सर सोचती हैं कि बेहतर नतीजे पाने के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ेगा, लेकिन एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन ने इस सोच को पूरी तरह पलट दिया है। अध्ययन में पाया गया कि जहां महिलाओं की भागीदारी ज्यादा होती है, वहां काम ज्यादा सटीक होता है, गलतियां कम होती हैं और कुल लागत भी घट जाती है।यानी सही टीम बनाना, बजट बढ़ाने से ज्यादा असरदार साबित हो रहा है।
5000 कंपनियों का डाटा देखा
अमेरिका की शोधकर्ताओं का यह अध्ययन रिव्यू ऑफ अकांउटिंग स्टीडिज की अंतरराष्ट्रीय रिसर्च जर्नल पत्रिका में प्रकाशित हुआ। स्टडी में करीब 10 साल तक करीब 5000 कंपनियों का डाटा देखा गया। अध्ययन में पाया गया कि जिन ऑडिट टीमों में महिलाओं की संख्या अधिक होती है, वे न केवल बेहतर परिणाम देती हैं, बल्कि कम खर्च में काम पूरा करती हैं।
ऑडिट टीम उन लोगों की टीम होती है, जो किसी कंपनी के हिसाब-किताब और कामकाज की जांच करती है। इसका मकसद यह देखना होता है कि कंपनी ने जो कमाई और खर्च बताया है, वह सही है या नहीं।
गलतियां करीब 9% कम हो जाती हैं
अध्ययन में पाया गया कि जिन ऑडिट टीमों में महिलाएं ज्यादा होती हैं, वे गलतियां कम करती हैं। काम की गुणवत्ता बेहतर होती है और खर्च भी कम आता है। ऑडिट की गलतियां करीब 9% कम हो जाती हैं।
ऑडिट की फीस लगभग 2% कम होती है। महिलाओं वाली टीम ज्यादा ध्यान से काम करती है और समय-पैसा दोनों बचाती है। अक्सर लोग सोचते हैं कि महिलाएं ऊपर की पोस्ट में हों तभी फर्क पड़ेगा लेकिन अध्ययन में पाया गया कि ऐसा नहीं है।
असली फर्क तब पड़ता है जब स्टाफ लेवल, सीनियर लेवल (मिड-लेवल) पर महिलाएं ज्यादा होती हैं। यही लोग डाटा चेक करते हैं। गलतियां पकड़ते हैं, जोखिम पहचानते हैं और अपने क्लाइंट से बात करते हैं।
महिलाएं टीम को बेहतर कैसे बनाती हैं
अध्ययन बताता है कि आम तौर पर महिलाएं ज्यादा डिटेल पर ध्यान देती हैं। खतरे को जल्दी पहचानती हैं। टीमवर्क और बातचीत बेहतर करती हैं और नैतिकता को ज्यादा महत्व देती हैं। ऑडिट जैसे काम में ये गुण बहुत जरूरी होते हैं।
शोधकर्ताओं ने कहा कि सिर्फ महिलाएं रखने से सब ठीक हो जाएगा, ऐसा नहीं है। ऑफिस का माहौल बहुत मायने रखता है। अगर महिलाओं को आगे बढ़ने का मौका मिले। सीनियर पोस्ट पर भी महिलाएं हों, सम्मान और सपोर्ट मिले तो उनका असर कई गुना बढ़ जाता है। लेकिन अगर ऊपर जाने का रास्ता बंद हो तो उनका असर कम हो जाता है।
काम की गुणवत्ता गिर सकती हैं
शोधकर्ता ने कहा कि अगर अनुभवी महिलाएं बीच में चली जाएं तो काम की गुणवत्ता गिरती है। गलतियां बढ़ती हैं और खर्च भी बढ़ सकता है। महिलाओं को टीम में रखना सिर्फ सही बात नहीं है, बल्कि समझदारी भरा बिजनेस फैसला भी है। खासकर अगर महिलाएं मिड-लेवल तक टिकें और उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिले, तो कंपनी को बेहतर काम और कम खर्च दोनों मिलते है।
