डेस्क :सर्वोच्च न्यायालय ने अजमेर स्थित 13वीं शताब्दी के सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर प्रधानमंत्री द्वारा राज्य प्रायोजित औपचारिक सम्मान या चादर चढ़ाने की प्रथा के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि चूंकि चादर चढ़ाई जा चुकी है, इसलिए यह मुद्दा निरर्थक हो गया है। पीठ ने यह भी कहा कि यह ऐसा मुद्दा नहीं है जिस पर न्यायालय निर्णय ले सके। याचिकाकर्ताओं ने भारत सरकार, जिसमें प्रधानमंत्री भी शामिल हैं, को वार्षिक उर्स समारोह के तहत अजमेर दरगाह पर चादर जैसे औपचारिक सम्मान अर्पित करने से रोकने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि ऐसे कृत्य जनता की इच्छा, राष्ट्रीय संप्रभुता और भारतीय संविधान के मूल्यों के विपरीत हैं।
