
दरभंगा। चराचर जगत के कल्याण के लिए धार्मिक अनुष्ठान का होना आवश्यक है। कलियुग में परमपिता परमेश्वर का नाम श्रवण ही श्रेष्ठ कर्म माना गया है। भौतिकवाद तथा पाश्चात्य संस्कृति के आवेग में समाज से शांति और सद्भाव का वातावरण खत्म हो चुका है जिसके लिए भागवत कथा का श्रवणपान करना आवश्यक है। दरभंगा सांसद सह लोकसभा में भाजपा सचेतक डा गोपाल जी ठाकुर ने रेलवे अध्ययन दल के दौरान ओडिशा प्रवास के क्रम में भगवान, जगन्नाथ की पावन धरती पर होटल जानकी पैलेस में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के समापन के अवसर पर भाग लेने के बाद उपरोक्त विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर सांसद डा ठाकुर का आयोजक मंडल द्वारा श्रद्धापूर्ण स्वागत किया गया।
भागवत कथा के समापन समारोह में सांसद डा ठाकुर ने कथा वाचक करुणामूर्ति आचार्य, योगेश प्रभाकर जी महाराज को सम्मानित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। संत श्री योगेश महाराज जी के सानिध्य को सांसद डा ठाकुर ने सुखद उपलब्धि बताते हुए कहा कि महाराज श्री योगेश जी के प्रेरक वचन और आध्यात्मिक ऊर्जा ने मन, आत्मा और चेतना को एक नई शांति व शक्ति प्रदान की है। उन्होंने इस सुखद अवसर की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा है कि भगवान श्री जगन्नाथ की कृपा, श्रीमद् भागवत कथा की अमृतवाणी और संतों का सान्निध्य यह संगम मेरे जीवन के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और अविस्मरणीय अनुभव रहेगा।
सांसद डा ठाकुर ने धार्मिक सत्संग को जीवन के लिए आवश्यक बताते हुए कहा कि कलियुग में परमपिता परमेश्वर का नाम श्रवण ही श्रेष्ठ कर्म माना गया है क्योंकि भौतिकवाद तथा पाश्चात्य संस्कृति के आवेग में समाज से शांति और सद्भाव का वातावरण खत्म हो चुका है जिसके लिए भागवत कथा का श्रवणपान करना आवश्यक है।