लखनऊ (ब्यूरो)। मेट्रो सेकंड कॉरीडोर को धरातल पर लाने के लिए कवायद तेज कर दी गई है। एक तरफ जहां यूटीलिटी शिफ्टिंग को लेकर सर्वे का काम पूरा किया जा चुका है, वहीं दूसरी तरफ ड्राइंग-डिजाइन समेत कई अन्य बिंदुओं को लेकर टेंडर फ्लोट कर दिए गए हैं।टेंडर प्रक्रिया पूरी होने में चार से पांच माह लग सकते हैं। इस प्रक्रिया के पूरी होते ही फील्ड पर सेकंड कॉरीडोर का काम होता हुआ नजर आने लगेगा।
कनेक्टविटी होगी बेहतर :सेकंड कॉरीडोर के बन जाने से पुराने लखनऊ के कई एरियाज की कनेक्टिविटी बेहतर हो जाएगी। अभी उन इलाकों में जाने के दौरान लोगों को जाम की समस्या का सामना करना पड़ता है। जब मेट्रो का संचालन शुरू हो जाएगा तो लोगों को परिवहन का एक बेहतर साधन मिलेगा। इसके साथ ही मेट्रो कनेक्टिविटी होने से पुराने लखनऊ के व्यापार को भी खासा बढ़ावा मिलेगा। पुराने लखनऊ में सबसे बड़ी अमीनाबाद मार्केट भी है। यहां रोजाना हजारों कस्टमर्स और व्यापारियों का आना होता है। मेट्रो कनेक्टिविटी होने से दूसरे शहर से आने वाले व्यापारियों और ग्राहकों को भी राहत मिलेगी।ये सर्वे हो चुका पूरा सेकंड कॉरीडोर में ज्यादातर मेट्रो स्टेशंस अंडरग्राउंड बनाए जाने हैं। इस वजह से यूटीलिटी शिफ्टिंग को लेकर सर्वे का काम पूरा किया जा चुका है। पूरी संभावना है कि आने वाले दिनों में एक बार फिर से यूटीलिटी शिफ्टिंग को लेकर फाइनल सर्वे कराया जा सकता है। अभी तक यह स्थिति साफ हो चुकी है कि कहां पर दिक्कतें सामने आ सकती हैं। उन दिक्कतों को दूर करने के लिए अभी से ही प्लान बनाने का काम शुरू कर दिया गया है।
पैसेंजर्स की बढ़ रही संख्या : इस समय पहले कॉरीडोर में मेट्रो पैसेंजर्स की संख्या तेजी से बढ़ती हुई नजर आ रही है। त्याहोर के आसपास तो पैसेंजर्स की संख्या एक लाख का आंकड़ा पार कर जाती है। वहीं सामान्य दिनों में भी सभी स्टेशंस मिलाकर फुटफॉल करीब 90 हजार से अधिक पैसेंजर्स का चल रहा है। जिससे बेहतर संकेत माना जा सकता है। पहले जिन स्टेशंस में पैसेंजर्स की संख्या बहुत अधिक नहीं रहती थी, वहां भी अब पैसेंजर्स की संख्या में इजाफा देखने को मिल रहा है। जिससे साफ है कि सेकंड कॉरीडोर में पैसेंजर्स की संख्या बहुत बेहतर रहने वाली है।
