गाज़ा में क़रीब 2 महीने पहले युद्धविराम लागू होने के बाद से खाद्य सुरक्षा की स्थिति बेहतर हुई है, और अकाल जैसी परिस्थितियां वहां फ़िलहाल नहीं हैं। मगर 75 प्रतिशत से अधिक आबादी के लिए स्थिति गम्भीर बनी हुई है और उन्हें भरपेट भोजन नहीं मिल रहा है और कुपोषण से भी जूझना पड़ रहा है।खाद्य सुरक्षा पर यूएन-समर्थित एक विश्लेषण में यह जानकारी सामने आई है। खाद्य अभाव और कुपोषण स्थिति पर नज़र रखने के लिए एकीकृत सुरक्षा चरण वर्गीकरण (IPC) के अध्ययन के अनुसार, ग़ाज़ा के किसी भी इलाक़े में फ़िलहाल ‘चरण 5’ की स्थिति नहीं है। इस विश्लेषण में खाद्य असुरक्षा को पांच चरणों में विभाजित किया जाता है। पांचवां चरण, अकाल है और यह सबसे ख़राब स्थिति है, जिसमें भुखमरी, गम्भीर कुपोषण के मामले और मौतें होती हैं।
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि 10 अक्टूबर को युद्धविराम लागू होने के बाद ग़ाज़ा पट्टी में मानवीय सहायता आपूर्ति होने और बाज़ारों में सामान पहुंचने से स्थिति बेहतर हुई है। इसके बावजूद लगभग पूरे ग़ाज़ा में अब भी खाद्य असुरक्षा, ‘चरण 4’ में है, जो कि आपात स्थिति को दर्शाता है। लाखों लोगों में अब भी ऊंची दर पर कुपोषण की स्थिति जारी है।
इस अध्ययन के अनुसार, मध्य-अक्टूबर से नवम्बर के अन्त तक, 16 लाख लोग यानी ग़ाज़ा की क़रीब 77 प्रतिशत आबादी, संकट स्तर पर (चरण 3) या उससे भी ख़राब खाद्य असुरक्षा स्थिति से जूझ रही थी। इनमें 5 लाख फिलिस्तीनी आपात (चरण 4) और 1 लाख से अधिक विनाशकारी (चरण 5) की खाद्य असुरक्षा स्थिति की चपेट में हैं।
स्थिति बेहतर, मगर नाज़ुक
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क में आगाह किया कि स्थिति में सुधार हुआ है लेकिन वो बहुत नाज़ुक है। अकाल को पीछे धकेला गया है। कहीं अधिक संख्या में लोगों की भोजन तक पहुंच है, जो कि उनके जीवित रहने के लिए ज़रूरी है। महासचिव ने कहा कि ग़ाज़ा में 16 लाख लोग यानी आबादी के 75 प्रतिशत से अधिक हिस्से के, चरम स्तर पर खाद्य असुरक्षा व कुपोषण जोखिम से पीड़ित होने की आशंका है। IPC विश्लेषण में कहा गया है कि मध्य-अप्रैल 2026 तक, 5.71 लाख लोग आपात स्तर पर खाद्य असुरक्षा का सामना कर सकते हैं और 1,900 फिलिस्तीनी विनाशकारी हालात से जूझेंगे।
कुपोषण एक बड़ी चिन्ता :गर्भवती व स्तनपान करा रही महिलाओं और बच्चों में कुपोषण एक बड़ी चिन्ता का विषय है। 6 से 59 महीने की आयु के लगभग 1 लाख बच्चे, मध्य-अक्टूबर 2026 तक कुपोषण की चपेट में रह सकते हैं। वहीं 37 हज़ार गर्भवती व स्तनपान करा रही महिलाओं के उपचार की भी आवश्यकता होगी।रिपोर्ट दर्शाती है कि खाद्य सहायता में वृद्धि हुई है, लेकिन सहायता अभियान में बुनियादी आवश्यकताओं का ही ध्यान रखा जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाएं, जल व साफ़-सफ़ाई प्रणाली, आजीविका व आवास व्यवस्था बुरी तरह चरमराई हुई है। इस वजह से, सर्दी के मौसम में स्थानीय परिवारों के लिए कठिन हालात पैदा हो गए हैं। इन्फोग्राफिक में प्रभावित आबादी और गंभीरता के स्तर के आंकड़ों के साथ दिसम्बर 2025 से अप्रैल 2026 तक गाजा पट्टी में तीव्र खाद्य असुरक्षा और तीव्र कुपोषण का अनुमान है।
स्थाई युद्धविराम की ज़रूरत :यूएन प्रमुख ने सचेत किया कि ग़ाज़ा में परिवार, असहनीय हालात को सहन कर रहे हैं। बच्चे, जलभराव की स्थिति में टैंट में सो रहे हैं और भारी बारिश व हवा की वजह से इमारतें ध्वस्त हो रही हैं। उन्होंने बताया कि मानवीय सहायता टीमें 15 लाख गर्म भोजन पैकेट की व्यवस्था कर रही हैं, पोषण केन्द्रों को फिर से खोला जा रहा है और जल व स्वास्थ्य सेवाओं को पुनर्बहाल किया गया है। हालांकि विशाल स्तर पर आवश्यकताएं बरक़रार हैं।
महासचिव गुटेरेश ने कहा कि वास्तविक मायनों में एक स्थाई युद्धविराम की आवश्यकता है। ग़ाज़ा में और अधिक सीमा चौकियों की, महत्वपूर्ण आपूर्ति पर पाबन्दियों में कमी लाने की, बेरोकटोक सुरक्षित मार्ग मुहैया कराने और सहायता धनराशि सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
