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भाकपा माले ने प्रो. सरोजनी सिंह को याद किया गया  प्रो. सरोजनी सिंह अपने व्यवहार में पूर्णतः प्रतिबद्ध प्रगतिशील जनवादी बौद्धिक व समर्पित पार्टी समर्थक थीं : बैद्यनाथ यादव 

दरभंगा। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय की गृह विज्ञान विभाग की पूर्व प्राध्यापिका तथा प्रगतिशील जनवादी बौद्धिक प्रो. सरोजनी सिंह की स्मृति में भाकपा माले के तत्वावधान में उनके दिग्घी पोखर स्थित आवास के प्रांगण में श्रद्धांजलि सभा हुई, विगत 18 नवंबर को उनकी मृत्यु हुई थी। श्रद्धांजलि सभा में भाकपा माले के जिला सचिव बैद्यनाथ यादव, वरिष्ठ माले नेता आर.के. सहनी, गंगा मंडल, ऐपवा नेत्री शनिचरी देवी, जसम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो. सुरेन्द्र सुमन आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत उनकी तस्वीर पर पुष्पांजलि से हुई। भाकपा–माले जिला सचिव बैद्यनाथ यादव ने कहासिद्धांत हमेशा व्यवहार से परखा जाता है। प्रो. सरोजनी सिंह अपने व्यवहार में पूर्णतः प्रतिबद्ध प्रगतिशील–जनवादी बौद्धिक व समर्पित पार्टी समर्थक थीं। उन्होंने बहुत ही कठिन समय में पार्टी के कार्यकर्त्ताओं को प्रश्रय दिया। पार्टी के विचारों को बौद्धिक वर्ग में पहुंचाने में भी उनकी स्मरणीय भूमिका थी। आज के इस खतरनाक समय में प्रो. सरोजनी सिंह होना आसान नहीं है। हमें उनसे प्रेरणा ग्रहण करते हुए पार्टी विचारों और सर्वहारा के हित और हक के लिए अनवरत काम करने का संकल्प लेना चाहिए, यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। वरिष्ठ माले नेता आर.के. सहनी ने प्रो. सरोजनी सिंह से संबंधित कई संस्मरण साझा किया और बताया जब माले भूमिगत थी उस दौर में वे पार्टी के संपर्क में आई और तमाम चुनौतियों और खतरों के बावजूद पार्टी के प्रति उनका समर्पण कभी कम नहीं हुआ। पूरी जिंदगी वे कम्युनिस्ट आचरण का पालन करती रहीं। प्रो.सिंह के पति व नेपाल सुप्रीम कोर्ट के वकील हिम्मत सिंह ने उन्हें याद करते हुए कहा भारत की तरफ से नेपाली क्रांति के लिए लड़ने वाले कुलदीप झा को शहादत के बाद बिल्कुल विस्मृत कर दिया गया था लेकिन सरोजनी जी ने अपने खर्चे पर जोगबनी (मधुबनी) में उनके नाम पर द्वार बनवा कर उन्हें जनस्मृति का अभिन्न अंग बनाने का काम किया। यह उनके व्यक्तित्व का ऐसा पक्ष है जो जीवन में विभिन्न अवसरों पर देखने को मिला। प्रो.सिंह के देवर व जन संस्कृति मंच के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रो.अवधेश सिंह ने कहा कि वे जनवादी स्त्री संगठन ऐपवा की सदस्य थीं। ऐपवा के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन में डेलिगेट बन कर गईं थीं। ऐपवा द्वारा प्रकाशित स्त्रीवादी पत्रिका ‘आधी जमीन’ के वितरण की जिम्मेदारी उन्होंने लम्बे समय तक संभाली। मेरा विचार है कि उनकी याद में स्मृति व्याख्यान या अन्य वार्षिक आयोजन जरूर होना चाहिए।

 

जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो. सुरेन्द्र सुमन ने कहा कि उन्हें मरणोपरांत पार्टी सदस्य की तरह हमेशा सम्मानित किए जाने की जरूरत है। विश्वविद्यालय में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए उन्होंने छात्र–छात्राओं तथा शोषित वर्ग के लिए यथावसर न्यायपूर्ण भूमिका निभाई थी, ये बात हम कभी भूल नहीं सकते।

 

कार्यक्रम का संचालन आरवाईए के राज्य उपाध्यक्ष संदीप चौधरी ने किया।

 

मौके पर माले नेता,अभिषेक कुमार,शनिचरी देवी, केसरी यादव, सोनू यादव, धनराज शाह, विनोद सिंह, डॉ.संतोष कुमार यादव, देवेंद्र कुमार, समीर, भोला जी,राकेश पासवान,अभिषेक,सुकनी देवी,गंगिया देवी समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे।

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