डेस्क : दिल्ली ब्लास्ट केस में एक और बड़ा खुलासा हुआ है. जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, आरोपी डॉक्टर्स अचानक आतंक की दुनिया में नहीं आए. उनका ब्रेनवॉश करीब 5 साल पहले शुरू हुआ था, जब वे MBBS की पढ़ाई या इंटर्नशिप कर रहे थे. 2020 के आसपास इनके हैंडलर्स ने सोशल मीडिया और ऑनलाइन चैट के जरिए इन्हें निशाने पर लेना शुरू किया. धीरे-धीरे इन्हें ऐसी बातें और सामग्री दिखाई गई जिसने इनके दिमाग में नफरत भरी और इन्हें आत्मघाती हमलों के लिए तैयार किया गया.
जांच में यह बात भी सामने आई है कि इन आरोपियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से तैयार किए गए वीडियो दिखाए गए. इनमें मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हिंसा और जनसंहार जैसी झूठी और भड़काऊ चीजें दिखाई गईं. मकसद था इनके मन में गुस्सा भरना और उन्हें आतंकवादी गतिविधियों के लिए तैयार करना. इसी मानसिक जाल में फंसकर ये सभी ब्लास्ट की साजिश का हिस्सा बने.
सूत्रों का दावा है कि इस पूरी साजिश की कड़ी कश्मीर के रहने वाले मुफ्ती इरफान अहमद वागे से जुड़ती है. साल 2023 में उसने श्रीनगर के गवर्मेंट मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रहे मुझम्मिल शकील गनाई को अपने प्रभाव में लिया. फिर मुझम्मिल ने ही नेटवर्क बढ़ाते हुए अदील अहमद राथर, उमर-उन-नबी और शाहीन सईद को जोड़ने में मदद की. यह पूरा मॉड्यूल पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद और अल-कायदा से जुड़े संगठन अंसार गजवा-तुल-हिंद से जुड़ा बताया जा रहा है.
जांच टीम के मुताबिक ये लोग सिर्फ एक धमाके तक सीमित नहीं रहने वाले थे. शुरुआती जांच बताती है कि इनका प्लान दिल्ली समेत कई राज्यों में लगभग 32 कार बम धमाके करने का था. इसी मॉड्यूल से जुड़े इनपुट्स के आधार पर जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कुछ घंटे पहले ही 2,900 किलो विस्फोटक जब्त किया था. माना जा रहा है कि इसी सामग्री का इस्तेमाल दिल्ली ब्लास्ट में भी हुआ.
इस केस में मुझम्मिल, अदील, मुफ्ती और शाहीन सईद पकड़े जा चुके हैं, जबकि अदील का भाई मुजफ्फर देश छोड़कर भाग चुका है. अब एजेंसियां उसके लोकेशन की तलाश में लगी हैं. मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं.
