कृषि

छत्तीसगढ़ पहुंचा ‘मखाना’, सीएम बघेल ने किया पहले प्रोसेसिंग सेंटर का उद्घाटन

डेस्क : विश्व बाजार में मखाना की बढ़ती लोकप्रियता और कमाई की वजह से अब धीरे-धीरे इसकी खेती के लिए किसान आगे आने लगे हैं. बिहार के मिथिला क्षेत्र की पहचान से जुड़े मखाना की खेती छत्तीसगढ़ में भी होने लगी है. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य में पहले मखाना प्रसंस्करण केंद्र (Makhana Processing Center) का उद्धाटन किया. इसके साथ ही इस प्रदेश के कई जिलों में इसकी खेती को बढ़ावा देने और किसानों की कमाई का रास्ता साफ हो गया है.

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ में रायपुर, धमतरी और महासमुंद के सीमित क्षेत्र में इसकी खेती हो रही है. मुख्यमंत्री बघेल ने रविवार को रायपुर के लिंगाडीह गांव में छत्तीसगढ़ के पहले मखाना प्रसंस्करण केंद्र का वर्चुअल तरीके से उद्घाटन किया. मखाना की खेती करने वाले दिवंगत किसान कृष्ण कुमार चंद्राकर के नाम पर लिंगाडीह के फार्म से उत्पादित मखाने को दाऊजी ब्रांड से लांच किया गया है. जो कि अब बाजार में मिलने लगेगा.

मखाना की खेती के बारे में दी जा रही है जानकारी

मखाने की खेती कर रही मनीषा चंद्राकर ने उसकी की खेती के तकनीकी और आर्थिक पहलुओं के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि लिंगाडीह के मखाना प्रोसेसिंग सेंटर एवं विपणन केंद्र द्वारा किसानों को मखाना खेती के लिए निशुल्क तकनीकी जानकारी दी जा रही है. मखाना क्षेत्र का समय-समय पर किसानों को भ्रमण कराया जा रहा है. प्रशिक्षण दिया जा रहा है. मखाना की खेती कम पानी में भी की जा सकती है. इसके लिए किसानों को जानकारी दी जा रही है. जहां जलजमाव वाले हिस्से हैं वहां खेती करने का तरीका और उसके बाद उसे निकालने के बारे में बताया जा रहा है.

क्या करता है यह केंद्र

मनीषा चंद्राकर ने बताया कि यह केंद्र किसानों के लिए मखाना बीज उपलब्ध कराता है. वहीं मखाने की खरीदी भी कर रहा है. मखाना के उत्पादन के बाद उसके बीज को लेकर किसानों को कहीं भटकने की जरुरत नहीं होती. बल्कि प्रोसेसिंग के लिए एक ही केंद्र पर सारी सुविधाएं मिल जाती हैं और उसके एवज में मखाना की अच्छी कीमत भी मिलती है.

क्या है विशेषज्ञ की राय

बिहार के दरभंगा स्थित सेंट्रल मखाना रिसर्च इंस्टीट्यूट (Central Makhana Research Institute ) के निदेशक आईपी सिंह बताते हैं कि मखाना की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग और बाजार को देखते हुए अब किसान इसकी खेती के लिए काफी हद तक आगे आने लगे हैं. इसके लिए देश के दूसरे हिस्से से भी किसान यहां ट्रेनिंग लेने आते हैं. अब कुछ लोग ऑनलाइन ट्रेनिंग भी ले रहे हैं. खासकर ऐसी जगहों के किसान जहां साल भर पानी लगा रहता है. ऐसी जगहों के लिए इसकी खेती एक बेहतरीन विकल्प है.

मखाना के बारे में जानिए

मखाना एक महत्वपूर्ण जलीय पौधा है, इसे आमतौर पर मखाना, गोरगन नट अथवा फॉक्स नट कहा जाता है. यह तालाबों, जलीय क्षेत्रों, दलदली भूमि और बारहमासी जलभराव क्षेत्रों में उगाया जाता है. इसका 80 फीसदी उत्पादन बिहार में होता है. उत्तर बिहार में सबसे अधिक खेती हो रही है. औषधीय गुणों से भरपूर मखाना में प्रोटीन, एंटी ऑक्सीडेंट, विटामिन (Vitamins),  कैल्शियम (calcium) और दूसरे पोषक तत्व (Nutrients) पाए जाते हैं. सर्वाधिक मांग पूजा-पाठ और व्रत में होती है. नमकीन बनाने में भी इसका उपयोग होता है.

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