डेस्क :बिहार की राजनीति में राहुल गांधी ने एक बार फिर वही गलती दोहरा दी है जो वह पहले भी कर चुके हैं। यह गलती है जनता की आस्था को ‘ड्रामा’ बताने की गलती। हैरानी की बात यह है कि राहुल गांधी की इस प्रकार की हर गलती का बड़ा खामियाजा कांग्रेस को हर बार भुगतना पड़ता है लेकिन राहुल फिर भी नहीं सबक लेते। छठ पूजा, पर राहुल गांधी का तंज न केवल राजनीतिक भूल थी, बल्कि चुनावी मायने में आत्मघाती भी थी। दिल्ली के यमुना तट पर छठ आयोजन का हवाला देते हुए जब राहुल ने कहा कि “प्रधानमंत्री छठ पूजा के बहाने ड्रामा करते हैं,” तो यह तीर सीधे प्रधानमंत्री मोदी पर नहीं, बल्कि उन करोड़ों माताओं-बहनों के दिल पर लगा, जो साल दर साल निर्जला व्रत रखकर सूर्यदेव और छठी मैया की पूजा करती हैं।
