बिहार

आखिर गठबंधन की ‘गदहपचीसी’ में कबतक उलझा रहेगा बिहार? बताएं नेता-मतदातागण

डेस्क :सिद्धांत विहीन गठबंधन की राजनीति से किसी भी जीवंत लोकतंत्र का कदापि भला नहीं हो सकता है। बिहार इसका दिलचस्प उदाहरण बन चुका है। यहां पर नीति और नियम दोनों का माखौल उड़ाया जा रहा है। चाहे एनडीए हो या इंडिया महागठबंधन (पूर्व नाम यूपीए), दोनों जगहों पर टिकट बंटवारे में जितनी सिरफुटौव्वल दिखाई पड़ी, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यदि मतदाताओं ने समझदारी नहीं दिखाई तो 14 नवम्बर से सरकार बनाने के लिए हॉर्स ट्रेडिंग होना तय है।

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