‘नवान्हिक व्याकरण महाभाष्य कोष’ था संगोष्ठी का विषय
दरभंगा : मुख्य वक्ता एवं परियोजनाध्येता प्रो. अशोक चंद्र गौड़ शास्त्री ने कहा- आईसीपीआर द्वारा प्राप्त परियोजना के तहत पतंजलि द्वारा विराजित महाभाष्य पर तीन खण्डो में (नवाह्निक भाग पर) कोष निर्माण कार्य प्रगति पर है। प्रथम खंड छपा। दूसरा छापने को तैयार। तीसरे पर काम जारी। विद्यार्थियों शोधार्थियों एवं अध्यापकों को होगा लाभ ।
कुलपति (गोष्ठी अध्यक्ष) ने कहा –
यह परियोजना संस्कृत छात्रों के लिए होगी अत्यंत उपयोगी।
मुख्य अतिथि प्रो सुरेश्वर झा ने इस कोष की तुलना निरुक्त से की।
विशिष्टातिथि डॉ सदानंद झा ने
अशोक चंद शास्त्री के इस महत्त्वपूर्ण कार्य की भूरि भूरि प्रशंसा की।
गोष्ठी संयोजक प्रो. दयानाथ झा जी ने महाभाष्य के न्यायों का भी कोष में समावेश किया जाए। कहते हुए अपना मत प्रस्तुत किया ।
गोष्ठी की शुरुआत वैदिक मंगलाचरण से आरंभ हुई जिसे अंकित मिश्रा ने किया।
गोष्ठी का संचालन व्याकरण विभागीय डाॅ.यदुवीरस्वरूप शास्त्री ने किया ।तथा अंत में धन्यवाद समर्पण डॉ एल सविता आर्या ने किया ।
इस गोष्ठी में व्याकरण विभागीय साधना शर्मा धर्मशास्त्र विभाग अध्यक्ष डॉ दिलीप कुमार झा , कुलानुशासक डाॅ. कुणाल कुमार झा, दर्शन विभाग अध्यक्ष डॉ धीरज कुमार पांडेय, शंभू शरण तिवारी, अवधेश कुमार श्रोत्रिय, रीतेश कुमार चतुर्वेदी, संतोष कुमार पासवान, सुधीर कुमार,धर्मवीर इत्यादि अध्यापक उपस्थित थे । छात्रों में रोहित, अवधेश, विश्व मोहन, गोविंद, सचिन, रचना एवं सभी शोधार्थी छात्र उपस्थित हुए।
