संस्कृत, संस्कृति एवं दायित्व के संवर्धन हेतु मैं अपने स्तर से करूंगा पूर्ण प्रयास- डॉ. कृष्णकान्त
शिक्षक का कार्य सिर्फ ज्ञान देना ही नहीं, बल्कि छात्रों का समुचित मार्गदर्शन एवं संस्कार प्रदान करना भी है- डॉ. चौरसिया

दरभंगा : ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी के आदेश से निर्गत पत्र के आलोक में विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग में नए अध्यक्ष के रूप में डॉ कृष्णकान्त झा ने योगदान किया। उन्होंने निवर्तमान अध्यक्ष डॉ घनश्याम महतो से पदभार ग्रहण किया। इससे पहले वे एम एल एस कॉलेज, सरिसव-पाही में संस्कृत विभागाध्यक्ष थे। इस अवसर पर प्रो जीवानन्द झा, डॉ आर एन चौरसिया, डॉ ममता स्नेही, डॉ मोना शर्मा, डॉ शिवानन्द झा, डॉ प्रियंका राय, डॉ संजीत कुमार राम, डॉ प्रत्यूष नारायण, डॉ विमलेश कुमार चौधरी, मंजू अकेला, संदीप घोष, सदानंद विश्वास, मणिपुष्पक घोष, मौसमी आकुली, सम्पा नन्दी, अमित कुमार झा, योगेन्द्र पासवान, ब्यूटी कुमारी तथा उदय कुमार उद्देश आदि उपस्थित थे। नए विभागाध्यक्ष तथा निवर्तमान विभागाध्यक्ष को पाग एवं चादर से सम्मानित किया गया तथा उपस्थित व्यक्तियों को श्यामा भोग लड्डू से मुंह मीठा कराया गया।
डॉ कृष्णकान्त झा ने कहा कि संस्कृत, संस्कृति एवं दायित्व के संवर्धन हेतु मैं अपने स्तर से पूर्ण प्रयास करूंगा। हमारे लिए छात्रहित सर्वोपरि रहेगा। उन्होंने कहा कि सभी शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मियों एवं छात्र-छात्राओं के सहयोग से संस्कृत विभाग की गरिमा का संरक्षण एवं संवर्धन किया जाएगा। शिक्षकों के लिए छात्र ही मुख्य धन होता है। छात्रों का उज्ज्वल भविष्य बनाना हम लोगों का दायित्व होगा।
पीजी संस्कृत के पूर्व अध्यक्ष एवं सीएमबी कॉलेज, घोघरडीहा के प्रधानाचार्य प्रो जीवानन्द झा ने कहा कि हर व्यक्ति में अनेक तरह के गुण होते हैं, जिनका सदुपयोग कर हमें जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। विभाग के सभी शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मी काफी योग्य एवं अनुभवी हैं। मुझे विश्वास है कि नए विभागाध्यक्ष को भी हर तरह का सहयोग मिलेगा और विभागाध्यक्ष भी खुले मन से सबके सहयोग से विभाग को नई ऊंचाई प्रदान करेंगे। निवर्तमान अध्यक्ष डॉ घनश्याम महतो ने डॉ कृष्णकांत की खूबियों को बताते हुए उन्हें विभागीय हर संभव सहयोग का संकल्प व्यक्त किया।
विभागीय प्राध्यापक डॉ आर एन चौरसिया ने विगत वर्षों की विभागीय उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए बताया कि संस्कृत विभाग में न केवल छात्रों की संख्या बढ़ी है, बल्कि 12 से अधिक प्राध्यापक, 30 से अधिक शिक्षक बने हैं। वहीं 8 से अधिक नेट/जेआरएफ हुए और अनेक छात्र बीएचयू आदि में अध्ययन एवं शोध के लिए चयनित हुए हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक का कार्य सिर्फ ज्ञान देना ही नहीं, बल्कि छात्रों को मार्गदर्शन एवं संस्कार देना भी होता है। डॉ ममता सनेही ने विभाग में सेमिनार, प्रतियोगिता आदि के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की। वहीं दर्शनशास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ शिवानन्द झा तथा संस्कृत-प्राध्यापिका डॉ मोना शर्मा आदि ने अध्यक्ष का स्वागत करते हुए अपने विचार रखें।
