डेस्क :नई दिल्ली। संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला ‘100 वर्ष की संघ यात्रा- नए क्षितिज’ के अंतिम दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्होंने कहा कि “भारत अखंड है, यह जीवन का तथ्य है। पूर्वज, संस्कृति और मातृभूमि हमें एक करते हैं। अखंड भारत केवल राजनीति नहीं, बल्कि जनमानस की एकता है। जब यह भावना जागेगी तो सब सुखी और शांतिपूर्ण रहेंगे।” संघ के बारे में यह धारणा गलत है कि वह किसी का विरोधी है। हमारे पूर्वज और संस्कृति समान हैं। पूजा-पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन पहचान एक है। भिन्न संप्रदायों में आपसी विश्वास कायम करने की आवश्यकता सभी पक्षों में है। मुसलमानों को यह आशंका छोड़नी होगी कि साथ चलने से उनका इस्लाम मिट जाएगा
